कोडरमा में खाद्य जांच लैब नहीं, नमूनों की रिपोर्ट आने में लग रहा करीब एक महीना

कोडरमा में खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए रांची भेजे जाते हैं। इस साल लिए गए 35 नमूनों में आठ जांच में विफल रहे, जबकि एक हजार से अधिक दुकानों का निरीक्षण किया गया।

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कोडरमा जिले में खाद्य सामग्री की जांच के लिए स्थानीय प्रयोगशाला नहीं होने से नमूनों को रांची भेजना पड़ रहा है। वहां जांच का दबाव अधिक रहने के कारण रिपोर्ट मिलने में करीब एक महीना लग जाता है। इससे मिलावट की शिकायतों की पुष्टि और संबंधित दुकानदारों पर तत्काल कार्रवाई करने में खाद्य सुरक्षा विभाग को कठिनाई होती है।

झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित कोडरमा में खाने-पीने की वस्तुओं से जुड़ी शिकायतें मिलती रहती हैं। त्योहारों के दौरान मिठाई और दूसरी खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने के साथ निगरानी की चुनौती भी बढ़ जाती है। जिले में मिठाई की सौ से अधिक दुकानें संचालित हैं, जहां प्रतिदिन दूध, मावा, पनीर और घी की खरीद-बिक्री होती है।

जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी अभिषेक आनंद के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने की स्थिति में पहले की तुलना में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अब भी लगभग एक महीने का समय लग जाता है। नमूनों की प्रयोगशाला जांच जरूरी है, क्योंकि घरेलू या प्रारंभिक तरीके से की गई जांच को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक खाद्य सामग्री के 35 नमूने लिए गए हैं। इनमें आठ नमूने जांच में विफल पाए गए। गड़बड़ी मिलने पर विभिन्न दुकानदारों से कुल 15 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। जिले में एक हजार से अधिक दुकानों की जांच की जा चुकी है और खामियां मिलने पर संबंधित खाद्य पदार्थ नष्ट कराए गए हैं।

जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की निर्माण तिथि और अन्य जरूरी विवरण भी देखे जाते हैं। प्रारंभिक जांच में सामग्री असुरक्षित मिलने पर उसे नष्ट कराया जा सकता है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाने समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जाती है।

मिलावट से जुड़े सात मामले फिलहाल कोडरमा व्यवहार न्यायालय में लंबित हैं और एक अन्य मामला न्यायालय भेजा जाना है। अपर समाहर्ता न्यायालय में चल रहे आठ मामलों का निपटारा किया जा चुका है। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को खरीदारी का बिल, उत्पाद का पैकेट, तस्वीर और रसीद सुरक्षित रखने की सलाह दी है, ताकि शिकायत मिलने पर विभागीय कार्रवाई में मदद मिल सके।