कोडरमा में पर्यटन विकास की नई कोशिशें, तिलैया डैम के लिए मिले 34 करोड़ रुपये पहले लौटे

तिलैया डैम, वृंदाहा जलप्रपात और ध्वजाधारी धाम जैसे स्थलों को सुविधाओं और आयोजनों से जोड़ने की तैयारी है। पहले मिली करीब 34 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हो सकी थी।

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कोडरमा के तिलैया डैम और आसपास का प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्र

कोडरमा में प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने की नई कोशिशें चल रही हैं। जिले के प्रमुख आकर्षणों में तिलैया डैम, वृंदाहा जलप्रपात, पेट्रो फॉल्स, ध्वजाधारी पहाड़ी और चंचला देवी मंदिर शामिल हैं। पहाड़ों, जंगलों, झरनों और जलाशयों से घिरे इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ने से पर्यटकों की संख्या और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना जताई गई है।

राज्य स्तर पर ग्रेड-ए पर्यटन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित तिलैया डैम जिले का प्रमुख पर्यटन केंद्र है। यहां पानी के बीच रेस्टोरेंट बोट की सुविधा शुरू की गई है और जलक्रीड़ा से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं। फरवरी में तीन दिवसीय वाटर स्पोर्ट्स आयोजन की तैयारी का उल्लेख किया गया है। जिला स्तर से कॉटेज निर्माण समेत अन्य पर्यटक सुविधाओं के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं।

हालांकि तिलैया डैम के विकास की पिछली योजना को झटका लग चुका है। पर्यटकीय सुविधाओं और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार से करीब 34 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन निर्धारित अवधि में राशि का उपयोग नहीं हो सका। इसके बाद धन वापस चला गया और प्रस्तावित सुविधाओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

धार्मिक पर्यटन के केंद्र ध्वजाधारी धाम में तीन दिवसीय राजकीय महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। प्रस्ताव को राज्य स्तरीय समिति की मंजूरी मिलने के बाद ही आगे की तैयारी होगी। आयोजन से धाम की धार्मिक पहचान के साथ उसके सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।

वृंदाहा जलप्रपात बारिश और उसके बाद के महीनों में पर्यटकों को आकर्षित करता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार जून से जनवरी तक यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। पेट्रो फॉल्स समेत जिले के दूसरे प्राकृतिक स्थलों पर भी सुरक्षा, पेयजल, शौचालय, ठहरने की व्यवस्था और बेहतर पहुंच जैसी सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता बताई गई है।

कोडरमा की रेल यात्रा को भी पर्यटन से जोड़ने की संभावना है। पहाड़ों के बीच बनी सुरंगें, जलाशयों पर पुल और जंगलों से गुजरती रेलवे लाइन यात्रियों को प्राकृतिक दृश्य दिखाती है। कोडरमा-रांची रेल परियोजना और प्रस्तावित कोडरमा-तिलैया रेल परियोजना पूरी होने पर इन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने तथा पर्यटन आधारित स्थानीय गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई गई है।