देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भादो पूर्णिमा से जुड़ा अढ़इया मेला किसान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ढाई दिनों तक आयोजित होने वाले इस मेले में खेती के जरूरी काम पूरे करने के बाद बड़ी संख्या में किसान बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
मेले में मुख्य रूप से बिहार के भागलपुर, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, बेगूसराय, दरभंगा, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा सहित कई जिलों के श्रद्धालु शामिल होते हैं। पहले भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भागीदारी अधिक मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ दूसरे जिलों से भी किसानों का आगमन बढ़ा है।
इस परंपरा में किसान खेती और परिवार की समृद्धि की कामना करते हुए बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाते हैं। कई श्रद्धालु अपने घर में पाली जा रही गाय का कच्चा दूध भी साथ लाते हैं और उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। यह प्रथा किसानों की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
धर्माचार्य पंडित लंबोदर परिहस्त के अनुसार, अढ़इया मेले का पुराना धार्मिक इतिहास है। मान्यता है कि रोपनी और पटवन जैसे कृषि कार्यों के बाद किसान अपनी फसल के लिए आशीर्वाद लेने बाबा मंदिर पहुंचते हैं। सावन और भादो में खेती की व्यस्तता के कारण सावन में नहीं आ पाने वाले कई किसान इस मेले में पूजा करते हैं।
मुंगेर और सहरसा से आए किसान श्रद्धालुओं ने भी मेले को अपनी खेती और पारिवारिक आस्था से जुड़ा बताया। श्रद्धालुओं के अनुसार, अढ़इया मेले के दौरान उन्हें बाबा के दरबार में जलाभिषेक और स्पर्श पूजा का अवसर मिलता है। अच्छी खेती और बेहतर फसल की कामना इस यात्रा का अहम हिस्सा रहती है।
भादो पूर्णिमा और मेले में संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन तथा मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। मंदिर की सुरक्षा से जुड़े संजय कुमार के मुताबिक, परिसर में करीब 200 से 250 जवान लगाए गए हैं। सुरक्षाकर्मियों को मंदिर की व्यवस्था सुचारू रखने और किसी विपरीत परिस्थिति से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है।