कोडरमा, सिमडेगा, गिरिडीह और सरायकेला के बालू घाटों की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू

खान एवं भूतत्व विभाग ने चार जिलों के बालू घाटों के लिए निविदाएं जारी की हैं। नीलामी सितंबर के पहले और दूसरे सप्ताह तक पूरी करने की तैयारी है।

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झारखंड में बालू घाटों की ई-नीलामी प्रक्रिया को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर

झारखंड के कोडरमा, सिमडेगा, गिरिडीह और सरायकेला में बालू घाटों की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खान एवं भूतत्व विभाग ने संबंधित घाटों के लिए निविदाएं जारी की हैं। विभाग की तैयारी सितंबर के पहले और दूसरे सप्ताह तक नीलामी पूरी करने की है।

जारी निविदा के अनुसार, चयनित बालू घाटों की बंदोबस्ती पांच वर्ष के लिए की जाएगी। उत्तर छोटानागपुर प्रमंडल के कोडरमा जिले में सबसे अधिक 33 बालू घाटों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। गिरिडीह और सरायकेला के भी कई घाटों की नीलामी प्रस्तावित है।

दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल के सिमडेगा जिले में 10 प्रमुख घाट चिह्नित किए गए हैं। इनमें कोरोमिया, पाइकपारा, खूंटीटोली-तामाडीह, गुलडा-करुआजोर, दुमकी-किरेसेरा, पिथरा-पोथाटोली, लाताकेल, रामजाल, सोगरा-नानेसेरा और गोर्रा के बालू घाट शामिल हैं।

मानसून के दौरान नदियों से बालू उठाव पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की रोक लागू रहती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक यह प्रतिबंध 10 जून से 15 अक्टूबर तक प्रभावी रहता है। इस अवधि में पहले से भंडारित बालू की कीमत बढ़ने और कई स्थानों पर निर्माण कार्य प्रभावित होने की स्थिति बनती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग मानसून की पाबंदी हटने से पहले बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी करना चाहता है। इसका उद्देश्य रोक समाप्त होने के बाद बालू की उपलब्धता बनाए रखना और विकास कार्यों के लिए आपूर्ति में आने वाली बाधा को कम करना है।

अक्टूबर में रोक हटने के बाद सड़क, पुल-पुलिया और सरकारी भवनों के साथ निजी निर्माण गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है। ऐसे में समय पर नीलामी पूरी होने से वैध तरीके से बालू उठाव शुरू करने और आम लोगों को उचित दर पर सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाने में मदद मिल सकती है।