झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक ने शनिवार को कोडरमा व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण किया। उन्होंने न्यायालय परिसर के विभिन्न कक्षों और कार्यालयों का दौरा कर वहां की न्यायिक व्यवस्था तथा उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य न्यायाधीश ने जिला अधिवक्ता संघ के सदस्यों के साथ बैठक भी की। अधिवक्ताओं ने उनके सामने बार और बेंच से जुड़ी समस्याएं रखीं। उन्होंने कहा कि न्यायालयों से जारी वारंट की समय पर तामिला नहीं होने के कारण कई मामलों के निपटारे में अनावश्यक विलंब होता है। पुलिस प्रशासन द्वारा न्यायिक आदेशों के अनुपालन में कथित लापरवाही का विषय भी बैठक में उठाया गया।
बैठक में निषेधाज्ञा संबंधी आदेशों और प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर होने वाली कार्रवाई से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों पर भी चर्चा हुई। अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश का ध्यान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आने वाली समस्याओं की ओर दिलाया।
जिला अधिवक्ता संघ ने कोडरमा बार एसोसिएशन के लिए नया भवन बनाने की मांग प्रमुखता से रखी। संघ के सदस्यों के अनुसार, अधिवक्ताओं की संख्या और न्यायिक गतिविधियां बढ़ने के कारण मौजूदा संसाधन पर्याप्त नहीं रह गए हैं। उन्होंने आधुनिक सुविधाओं वाले नए बार भवन की आवश्यकता बताई। मुख्य न्यायाधीश ने उनकी बातें सुनीं और आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया।
कोडरमा पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश का पारंपरिक नृत्य और संगीत से स्वागत किया गया। हॉली फैमिली स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि जिला अधिवक्ता संघ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया। दौरे को देखते हुए न्यायालय परिसर के साथ जिले में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए थे।
न्यायालय का निरीक्षण पूरा करने के बाद मुख्य न्यायाधीश तिलैया डैम भी पहुंचे। उन्होंने डैम परिसर की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और आसपास की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी सतर्क रहे।