धनबाद में कोयला उद्योग से जुड़े कर्मचारियों की स्वास्थ्य निगरानी को अधिक नियमित बनाने की तैयारी है। कोल इंडिया लिमिटेड ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-दशा संहिता, 2020 और उससे जुड़े नियमों के अनुरूप मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का प्रारूप बनाया है। इसे तीन सितंबर को हुई एपेक्स संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों के सामने रखा गया था।
प्रारूप में आवधिक चिकित्सा जांच की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित है। अभी खदान में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की यह जांच अधिकतम पांच वर्ष के अंतराल पर की जाती है। कंपनी अब खदान कर्मियों की शत-प्रतिशत वार्षिक आवधिक जांच की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसके साथ ही 40 वर्ष की आयु पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए हर साल स्वास्थ्य परीक्षण का प्रावधान रखा गया है।
कंपनी की स्वास्थ्य सेवाओं में फिलहाल 976 डॉक्टर कार्यरत हैं। इनमें 207 विशेषज्ञ और 48 व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक शामिल हैं। स्वास्थ्य ढांचे के तहत 63 अस्पताल, 69 व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं आवधिक जांच केंद्र, 292 औषधालय, 3,611 बिस्तर और 503 एंबुलेंस संचालित होने की जानकारी दी गई है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा में बुनियादी ढांचे, उपकरणों, मानव संसाधन और सूचना तकनीक को चार प्रमुख क्षेत्र माना गया है। मानव संसाधन की जरूरत पूरी करने के लिए 437 अतिरिक्त पद आवश्यक बताए गए हैं। अब तक 10 संविदा चिकित्सकों और 69 पैरामेडिकल कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। क्षमता बढ़ाने के लिए 183 डॉक्टरों को आईएलओ चेस्ट एक्स-रे प्रशिक्षण भी दिया गया है।
महिला कर्मियों की चिकित्सा जांच महिला डॉक्टर से कराने या जांच के दौरान महिला परिचारिका की मौजूदगी सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है। बचाव दल के प्रशिक्षित सदस्यों की वार्षिक जांच जारी रखने की भी तैयारी है। चिकित्सा परीक्षण, स्वास्थ्य अभिलेख और व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी को डिजिटल स्वरूप देने के लिए सीआईएल-मेडएक्स मंच विकसित किया जा रहा है।
सुरक्षा प्रबंधन के स्तर पर 100 या अधिक कर्मचारियों वाली खदानों में समान संख्या में नियोक्ता और कर्मचारी प्रतिनिधियों वाली समिति का प्रस्ताव रखा गया है। समिति में अधिकतम 20 सदस्य और महिला प्रतिनिधित्व का प्रावधान होगा। सुरक्षा अधिकारियों की संख्या उत्पादन के बजाय कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय करने की तैयारी भी है। ये व्यवस्थाएं अभी प्रस्तावित प्रारूप का हिस्सा हैं; इनके अंतिम क्रियान्वयन का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।