झारखंड में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए बुधवार से व्यापक अभियान शुरू होगा। स्वास्थ्य विभाग ने ठेले-खोमचे पर बिकने वाले गोलगप्पे और समोसे से लेकर बड़े होटलों व प्रतिष्ठानों में परोसे जाने वाले खाद्य उत्पादों तक के नमूने लेने का निर्देश दिया है। जांच में मिलावट, दूषण या गुणवत्ता की कमी मिलने पर संबंधित व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के अभिहित पदाधिकारियों और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में नमूने एकत्र करने, उन्हें प्रयोगशाला भेजने और गड़बड़ी मिलने के बाद अपनाई जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया पर जानकारी ली गई।
अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि अभियान केवल मिठाई, पनीर या कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा। बाजार में बिकने वाले अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थों की जांच की जाएगी। त्योहारों के दौरान ठेलों की संख्या और खाद्य सामग्री की बिक्री बढ़ने को देखते हुए जिलों को मिलावटी या दूषित सामग्री की बिक्री रोकने के लिए अभियान तेज करने को कहा गया है।
त्वरित जांच के लिए जरूरी रसायनों और अन्य संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है। रांची स्थित फूड सेफ्टी लैब में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा जांच में इस्तेमाल होने वाले रसायन और सामग्री समय पर खरीदने को कहा गया है। संयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त अनुज कुमार प्रसाद को क्षेत्र में जाकर नमूना संग्रह और जांच प्रक्रिया का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अभियान में तीन चलंत जांच वाहन भी लगाए जाएंगे। इनमें दो वाहन रांची और एक धनबाद में तैनात किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों की मदद से मौके पर खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच की जा सकेगी। नमूने लेने और उनकी जांच के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
विभाग अभियान की नियमित समीक्षा करेगा। दुर्गा पूजा से पहले होने वाली अगली समीक्षा में जिलों से लिए गए नमूनों, उनके जांच परिणामों और की गई कार्रवाई की जानकारी देखी जाएगी। विभाग का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाना और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री को रोकना है।