रांची में कांग्रेस ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन कानून, 2026 के विरोध में 29 सितंबर को राजभवन घेराव करने की घोषणा की है। पार्टी ने इस प्रदर्शन में संशोधित कानून के साथ भ्रष्टाचार और कथित चंदा चोरी के मुद्दे भी उठाने की बात कही है। कार्यकर्ताओं और आम लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है।
प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट मनीष राज, प्रदेश प्रवक्ता अवधेश प्रजापति और जिला अध्यक्ष राजेंद्र दास ने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार तथा राजस्व झारखंड के विकास से सीधे जुड़े हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि संशोधित प्रावधानों से झारखंड जैसे खनिज-संपन्न राज्यों के अधिकार और आमदनी प्रभावित हो सकती है।
पार्टी नेताओं ने आशंका जताई कि खनिज राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ने की स्थिति में राज्य में शिक्षा, रोजगार और विकास से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। अवधेश प्रजापति ने केंद्र पर राज्यों के खनिज अधिकार सीमित करने का आरोप लगाया। ये कांग्रेस के दावे हैं और सामने आए विवरण में इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र आकलन नहीं दिया गया है।
केंद्र सरकार का पक्ष इन आरोपों से अलग है। सरकार के अनुसार संशोधन का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में स्थिर और समान राजकोषीय व्यवस्था बनाना है। उसका कहना है कि कानून राज्यों के भूमि और खनिज अधिकार समाप्त नहीं करता, हालांकि खनिज अधिकार तथा खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने को कुछ केंद्रीय शर्तों के अधीन किया गया है।
केंद्र का दावा है कि खनन क्षेत्र से मिलने वाले कुल राजस्व का करीब 90 प्रतिशत राज्यों को प्राप्त होता है और संशोधन के बाद भी यह व्यवस्था बनी रहेगी। सरकार के मुताबिक राज्यों को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन और जीएसटी में हिस्सा मिलता रहेगा। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से वित्त वर्ष 2025-26 में राज्यों को खनिज क्षेत्र से करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये मिलने की बात कही गई है।
कांग्रेस 29 सितंबर के राजभवन घेराव के माध्यम से खनिज अधिकार, राज्यों के राजस्व और अपने अन्य राजनीतिक मुद्दों पर विरोध दर्ज कराएगी। पार्टी ने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में रांची पहुंचने को कहा है। प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए आयोजन संबंधी आगे की व्यवस्था या प्रशासनिक तैयारी का विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।