मेदिनीनगर में ध्वजारोहण के साथ 10 दिवसीय पर्यूषण महापर्व शुरू

शहर के जैन मंदिर में विधि-विधान से पूजा और ध्वजारोहण किया गया। दस दिनों तक व्रत, स्वाध्याय, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

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मेदिनीनगर के जैन मंदिर में पर्यूषण महापर्व की पूजा में शामिल श्रद्धालु

मेदिनीनगर के बाजार स्थित जैन मंदिर में बुधवार को ध्वजारोहण और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ दस दिवसीय पर्यूषण महापर्व की शुरुआत हुई। जैन श्रद्धालुओं ने सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। आयोजन राजस्थान के सांगानेर स्थित श्रमण संस्कृति संस्थान से आए पंडित आदिश जैन शास्त्री के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

आयोजकों के अनुसार, भादो महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी से आरंभ होने वाला यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाता है। पर्व के दौरान श्रद्धालु उपवास और व्रत रखने के साथ पूजा, स्वाध्याय तथा प्रवचन में भाग लेंगे। समाज के लिए यह अवधि आत्मसंयम, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ी मानी जाती है।

महापर्व के पहले दिन अशोक कुमार पांड्या, जम्बू गंगवाल और अरुण गंगवाल ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया। पूजा से पहले भगवान श्रीजी को विराजमान किया गया। धर्मचंद और पंकज कुमार पाटनी के परिवार ने प्रथम अभिषेक किया, जबकि अशोक पांड्या और उनके परिजनों ने शांतिधारा की धार्मिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

मंदिर में पंडित आदिश जैन शास्त्री के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पूजा-अनुष्ठान किया और तत्वार्थ सूत्र का पाठ हुआ। शाम के कार्यक्रम में आरती एवं प्रवचन के बाद जैन महिला मंडल की सदस्यों ने भक्तिमय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। आयोजन में जैन समाज, महिला मंडल और जिनेंद्र भक्त मंडल से जुड़े अनेक लोग शामिल हुए।

प्रवचन में पंडित आदिश जैन शास्त्री ने जैन धर्म के अहिंसा, अपरिग्रह और विचारों की उदारता से जुड़े सिद्धांतों पर चर्चा की। उन्होंने दस लक्षण धर्म की जानकारी देते हुए बताया कि महापर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा के रूप में मनाया जाता है। उनके अनुसार इसका आशय केवल किसी को माफ करना नहीं, बल्कि मन से क्रोध, द्वेष और बैर का त्याग करना भी है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में क्षमा, मैत्री और संयम का भाव अपनाने का आग्रह किया। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि महापर्व के शेष दिनों में भी नियमित पूजा, धार्मिक अध्ययन और प्रवचन जारी रहेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालु आत्मकल्याण और सद्भाव के संदेश पर मनन करेंगे।