खलारी के जेहलीटांड़ में फिर धंसी जमीन, ग्रामीणों ने तकनीकी सर्वे और विस्थापन की मांग उठाई

रांची के खलारी कोयलांचल स्थित जेहलीटांड़ में एक घर के पास जमीन धंसने और गड्ढे से धुआं निकलने के बाद ग्रामीणों ने स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग की है।

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खलारी के जेहलीटांड़ में भू-धंसान से बना गहरा गड्ढा

रांची जिले के खलारी कोयलांचल स्थित जेहलीटांड़ में बुधवार सुबह जमीन धंसने की घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। एक ग्रामीण के घर के समीप बाड़ी में तेज आवाज के साथ जमीन धंसी और वहां कुएं जैसा गहरा गड्ढा बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, गड्ढे से भूमिगत कोयले की आग का दमघोंटू धुआं भी निकल रहा था।

घटना की सूचना मिलने पर केडीएच परियोजना के पदाधिकारी और प्रबंधक अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित स्थान का निरीक्षण किया। इसके बाद प्रबंधन ने जेसीबी की सहायता से गड्ढे तथा वहां जमा मलबे को भरवाकर जमीन समतल कराई।

प्रभावित परिवार का कहना है कि इस इलाके में भू-धंसान की यह पहली घटना नहीं है। परिवार के मुताबिक, कुछ वर्ष पहले इसी घर के भीतर स्थित बागान में भी जमीन धंसी थी। रिहायशी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं दोहराए जाने से आसपास रहने वाले लोग किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका जता रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, चालू खदान के नजदीक दर्जनों रैयतों के मकान बने हुए हैं। उनका कहना है कि मानसून की लगातार बारिश के दौरान जमीन के भीतर पानी पहुंचने से धंसाव की घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि, धंसान के सटीक कारण की किसी तकनीकी जांच का निष्कर्ष उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने विश्रामपुर बस्ती और जेहलीटांड़ में पहले भी कई बार जमीन धंसने की घटनाएं होने की बात कही है। उनके मुताबिक, करकट्टा कॉलोनी के विश्रामपुर क्षेत्र में एक घर के पास तीन से चार बार धंसाव हो चुका है, जबकि जेहलीटांड़ में भी एक अन्य मकान के समीप ड्रम या कुएं के आकार का गड्ढा बन चुका है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर बार गड्ढे को मिट्टी से भर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने भू-धंसाव से प्रभावित क्षेत्रों का तकनीकी सर्वे कराने, दीर्घकालिक सुरक्षा उपाय लागू करने और जोखिम वाले स्थानों पर रहने वाले परिवारों को सुरक्षित जगह पर विस्थापित करने की मांग की है।