खूंटी के गढ़सिदम में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जागरूकता अभियान, मुआवजा प्रक्रिया समझाई

रनिया प्रखंड के गढ़सिदम गांव में ग्रामीणों को वन्यजीवों से मकान, फसल या संग्रहित अनाज की क्षति पर सूचना देने, आवेदन करने और विधिक सहायता पाने की प्रक्रिया बताई गई।

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खूंटी जिले के रनिया प्रखंड की जयपुर पंचायत स्थित गढ़सिदम गांव में शुक्रवार को मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, खूंटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को उनके अधिकारों, कानूनी सहायता और मुआवजे से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई।

यह कार्यक्रम झालसा, रांची के निर्देशन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष-सह-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रसिकेश कुमार के मार्गदर्शन में हुआ। अभियान नालसा की मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने संबंधी योजना-2025 के तहत आयोजित किया गया।

गढ़सिदम में प्राधिकार की पीएलवी लक्ष्मी देवी, चंदमनी तुबिद और दुलारी कंडुलना ने ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष के बाद उपलब्ध कानूनी उपायों तथा सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। कार्यक्रम के दौरान लोगों के बीच जागरूकता पर्चे भी बांटे गए।

ग्रामीणों को विशेष रूप से जंगली हाथियों के कारण मकान, फसल और संग्रहित अनाज को होने वाली क्षति के मामलों में मुआवजे की प्रक्रिया बताई गई। उन्हें जानकारी दी गई कि वन्यजीव से किसी तरह का नुकसान होने पर संबंधित विभाग को तत्काल सूचना देना जरूरी है।

कार्यक्रम में बताया गया कि सूचना देने के बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया जा सकता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र पाए जाने वाले प्रभावित लोगों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जा सकती है। जरूरतमंद और पात्र ग्रामीणों के लिए निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध होने की जानकारी भी साझा की गई।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कमलेश बेहरा के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके अधिकारों और न्यायिक सहायता की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना है। अभियान के माध्यम से प्रभावित परिवारों तक आवेदन, मुआवजा और विधिक सहयोग से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी पहुंचाई गई।