खूंटी जिले के पेलोल, बिचना और आसपास के कई गांवों में काश के सफेद फूलों ने प्राकृतिक परिदृश्य बदल दिया है। पहाड़ियों, जंगलों और नदियों के किनारे दूर तक फैले फूल सफेद चादर जैसा दृश्य बना रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ रास्ते से गुजरने वाले यात्रियों के लिए भी यह नजारा आकर्षण का केंद्र बन गया है।
पेलोल और बिचना के अलावा छाता भोंडा, कुंजला, जलटंडा, सुत्ती, पांडु और जुर्दाग सहित आसपास के गांवों में काश के फूल खिले हैं। बंजर पड़ी जमीन के बड़े हिस्से पर सफेद फूल दिखाई दे रहे हैं। हरे जंगलों और पहाड़ियों की पृष्ठभूमि में इनकी मौजूदगी इलाके को अलग रूप दे रही है।
पेलोल-बिचना नदी और तजना नदी के आसपास भी काश के फूलों का फैलाव देखा जा रहा है। हवा चलने पर एक साथ लहराते फूलों को देखने के लिए राहगीर कुछ देर रुक रहे हैं। कई लोग मोबाइल फोन से तस्वीरें लेने के साथ इस दृश्य के बीच सेल्फी भी बना रहे हैं।
रांची-खूंटी-सिमडेगा मुख्य स्टेट हाईवे पर हूटार से बिचना के बीच सड़क किनारे भी सफेद काश के फूल नजर आ रहे हैं। इससे इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को पहाड़ियों, हरियाली और फूलों का मिला-जुला दृश्य दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्र का यह मौसमी बदलाव सड़क यात्रा के दौरान भी लोगों का ध्यान खींच रहा है।
भाद्रपद का महीना शुरू होने के साथ काश के फूलों की यह छटा सामने आई है। नदी तटों, खाली जमीन और पहाड़ी इलाकों में एक साथ खिले फूलों ने खूंटी के ग्रामीण भू-दृश्य को विशेष पहचान दी है। फिलहाल स्थानीय निवासी और राहगीर इस मौसमी प्राकृतिक दृश्य को अपने कैमरों में सहेज रहे हैं।