गढ़वा एसआईआर में दूसरे राज्यों से जारी जन्म और उम्र प्रमाणपत्र भी होंगे मान्य

गढ़वा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान दूसरे राज्य में जन्मे या पहले वहां रह चुके मतदाता संबंधित राज्य से जारी मान्य दस्तावेज सत्यापन के लिए दे सकेंगे।

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गढ़वा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया

गढ़वा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान झारखंड से बाहर जारी मान्य दस्तावेज भी स्वीकार किए जाएंगे। दूसरे राज्य में जन्मे या पहले वहां रह चुके मतदाता जन्मस्थान, उम्र और पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए उस राज्य के सक्षम पदाधिकारी से जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर सकेंगे। किसी दस्तावेज को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं माना जाएगा कि वह झारखंड से जारी नहीं हुआ है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन कार्यालय के आदेश से उन मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट हुई है जिन्हें सत्यापन के क्रम में नोटिस मिला है। इसका असर गढ़वा में चल रही दावे-आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया पर पड़ेगा। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों से संबंध रखने वाले परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी होगी।

सत्यापन में वंशावली, सक्षम पदाधिकारी द्वारा जारी पारिवारिक सूची, खतियान और शैक्षणिक प्रमाणपत्र सहित निर्वाचन आयोग से निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज दिए जा सकते हैं। हालांकि, दूसरे राज्य का प्रमाणपत्र स्वीकार किए जाने का अर्थ बिना जांच मंजूरी नहीं है। निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेज की प्रामाणिकता और उसमें दर्ज विवरण की जांच करेंगे।

जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुद झा ने मतदाताओं से कहा है कि नोटिस मिलने पर वे निर्धारित समय में उपलब्ध प्रमाणों के साथ सुनवाई में उपस्थित हों। यदि जन्म या पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है, तो वहां के सक्षम अधिकारी से जारी मान्य दस्तावेज पेश किया जा सकता है। समय सीमा का पालन करने से सत्यापन की प्रक्रिया सुचारु रखने में मदद मिलेगी।

निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाता के लिए भारतीय नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना और निर्धारित अर्हता तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करना आवश्यक है। मौजूदा एसआईआर में एक अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि माना गया है। इस तारीख तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिकों के विवरण का भी नियमों के अनुसार सत्यापन किया जा रहा है।

निर्वाचन कार्यालय के अनुसार प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखना और अपात्र नामों को सूची में बने रहने से रोकना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाहर से जारी प्रमाणपत्र के कारण किसी मतदाता को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन प्रत्येक दस्तावेज और उसमें दी गई जानकारी नियमानुसार जांच के दायरे में रहेगी।