गढ़वा जिले में त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने मिलावट और अमानक उत्पादों के खिलाफ जांच तेज करने का निर्देश दिया है। उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों से थोक एवं खुदरा बाजारों, सुपर मार्केट, किराना दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित निगरानी करने को कहा है। यह निर्देश समाहरणालय में हुई जिला स्तरीय परामर्शी समिति की बैठक में खाद्य सुरक्षा कार्यों की समीक्षा के दौरान दिया गया।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एक अप्रैल से 12 अक्टूबर 2026 तक जिले के 264 खाद्य प्रतिष्ठानों, हाट-बाजारों, मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन केंद्रों का निरीक्षण किया गया। इस अवधि में खाद्य पदार्थों के 63 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
पनीर की गुणवत्ता परखने के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत 35 खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया। मौके पर पनीर की जांच के साथ 11 नमूने राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजे गए। अधिकारियों के अनुसार, पुरानी बाजार स्थित प्रकाश इंटरप्राइजेज में जांच के दौरान 35 किलोग्राम मिलावटी पनीर जब्त कर नष्ट कराया गया। प्रतिष्ठान पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 69 के तहत 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
प्रशासन की समीक्षा में बताया गया कि एक अप्रैल से 12 अक्टूबर तक खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपर समाहर्ता के न्यायालय ने कुल छह लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। धारा 69 के अंतर्गत अलग-अलग मामलों में एक लाख 85 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। पिछले एक वर्ष में पनीर के 21 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें अवमानक मिले नमूनों से संबंधित मामलों में खाद्य कारोबारियों पर कुल दो लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
उपायुक्त ने अधिकारियों को एफएसएसएआई द्वारा चिह्नित संदिग्ध, अमानक और गलत लेबल वाले उत्पादों की उपलब्धता, भंडारण तथा बिक्री की जांच करने को कहा। प्रशासन का कहना है कि त्योहारों में मांग बढ़ने के कारण बाजारों में लगातार निगरानी जरूरी है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने और पनीर के नमूने लेने का अभियान जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
बैठक में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों ने वाहन उपलब्ध नहीं होने से नियमित निरीक्षण में आ रही परेशानी भी रखी। इसके बाद उपायुक्त ने अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी-सह-अभिहित अधिकारी को जांच दल के लिए वाहन की सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिया।