रांची समेत झारखंड के विभिन्न हिस्सों में चिकित्सकों ने अपनी पांच मांगों को लेकर मंगलवार से चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ और आठ अन्य चिकित्सा संगठनों से जुड़े डॉक्टर काला बिल्ला लगाकर काम कर रहे हैं। संगठनों ने यह सांकेतिक विरोध 20 अक्टूबर तक जारी रखने की घोषणा की है।
आंदोलन के पहले दिन रांची के रिम्स, सदर अस्पताल और प्रमुख निजी अस्पतालों में डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगाकर ओपीडी में मरीजों का इलाज किया। संगठनों का कहना है कि निर्धारित अवधि में मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।
चिकित्सा संगठनों ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कार्य बहिष्कार के दौरान आपातकालीन और जीवनरक्षक सेवाएं चालू रखी जाएंगी। बुधवार को सभी जिला मुख्यालयों में संयुक्त प्रेस वार्ता करने तथा संबंधित उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम भी तय किया गया है।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करना और ड्यूटी के दौरान महिला चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में व्यावहारिक संशोधन, अस्पतालों एवं क्लिनिक के लिए एकल खिड़की लाइसेंस व्यवस्था और चिकित्सकों व दंत चिकित्सकों को समयबद्ध प्रोन्नति देने की मांग रखी गई है।
संगठनों ने रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के मानदेय व स्टाइपेंड से जुड़े मामलों के समाधान तथा आयुष्मान भारत योजना के लंबित बकाये के निपटारे की मांग भी की है। सरकार और चिकित्सा संगठनों को मिलाकर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने का प्रस्ताव भी उनकी मांगों में शामिल है।
सरकारी और निजी क्षेत्र के डॉक्टरों ने सोमवार को हुई ऑनलाइन संयुक्त बैठक में आंदोलन को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई थी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ पहले दौर की बातचीत को सकारात्मक बताया गया है, लेकिन संगठन लिखित और ठोस समाधान चाहते हैं। विभाग के साथ दूसरे दौर की वार्ता शुक्रवार को प्रस्तावित है।