गढ़वा में चक्रवात के असर से 11.7 मिमी बारिश, तैयार धान पर नुकसान का खतरा

गढ़वा जिले में रुक-रुककर हुई बारिश से रबी की तैयारी के लिए खेतों में नमी बढ़ी है, जबकि कटे और तैयार धान को नुकसान पहुंचने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

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गढ़वा जिले में बारिश के बीच खेत में तैयार धान की फसल

गढ़वा जिले में अर्नब चक्रवात के प्रभाव से हुई बारिश किसानों के लिए राहत के साथ चिंता भी लेकर आई है। जिले के कई प्रखंडों में रुक-रुककर पानी बरसने से खेतों में नमी बढ़ी है, जो रबी फसलों की तैयारी में सहायक हो सकती है। दूसरी ओर, पककर तैयार धान और कटाई के बाद खेतों में छोड़ी गई उपज के भीगने का खतरा बढ़ गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे बारिश शुरू हुई और गुरुवार को भी दिनभर अलग-अलग समय पर होती रही। इस अवधि में गढ़वा जिले में 11.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। हालांकि बारिश के साथ तेज आंधी या तूफान जैसी स्थिति नहीं बनने से कुछ राहत रही।

मौसम में आए इस बदलाव का सबसे अधिक असर उन किसानों पर पड़ सकता है जिनके खेतों में धान कटाई के लिए तैयार है। जिन किसानों ने फसल काटकर खेत में ही रखी है, उनके सामने उसे बारिश से सुरक्षित करने की चुनौती है। लगातार नमी रहने पर तैयार उपज प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

वहीं, जिन खेतों में रबी की बुआई की तैयारी होनी है, वहां बारिश मिट्टी में आवश्यक नमी उपलब्ध करा सकती है। इस तरह एक ही बारिश खरीफ की तैयार फसल के लिए जोखिम और आगामी रबी मौसम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। वास्तविक लाभ या नुकसान खेत और फसल की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करेगा।

कृषि एवं वानिकी विभाग के डीन डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक, चक्रवात 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद कमजोर होकर गहरे अवदाब में बदल गया था। इसके बाद 29 अक्टूबर की शाम यह सुव्यक्त निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित हुआ, जिसका केंद्र उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ और उत्तर-पूर्व तेलंगाना के आसपास था। उनके अनुसार यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए और कमजोर होने की स्थिति में थी।