गढ़वा में जीवित्पुत्रिका व्रत पर महिलाओं ने की सामूहिक पूजा, रविवार को होगा पारण

श्री नीलकंठ महादेव मंदिर और रमना क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर व्रती महिलाओं ने संतान के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के साथ निर्जला उपवास रखा।

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गढ़वा में जीवित्पुत्रिका व्रत के अवसर पर सामूहिक पूजा करती महिलाएं

गढ़वा जिले में जीवित्पुत्रिका व्रत के अवसर पर शनिवार को महिलाओं ने सामूहिक पूजा-अर्चना की। बंडा पहाड़ स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में पहुंचीं व्रती महिलाओं ने अपनी संतानों के अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखा।

मंदिर परिसर में महिलाओं ने एक साथ बैठकर धार्मिक विधियों के अनुसार पूजा की। पुरोहित ओमप्रकाश पाठक ने अनुष्ठान संपन्न कराया और व्रत से जुड़ी परंपराओं का पालन कराया। श्रद्धालुओं की मौजूदगी के कारण पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

पूजा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जागृति युवा क्लब की ओर से की गई थीं। क्लब के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार पाल के अनुसार, सदस्यों ने श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए आयोजन स्थल की व्यवस्था संभाली। कार्यक्रम में क्लब के पदाधिकारी और अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।

रमना क्षेत्र में भी जीवित्पुत्रिका पर्व शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ। शनिवार को महिलाओं ने अलग-अलग गांवों के जलाशयों, नदियों और तालाबों में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना की और निर्जला व्रत का संकल्प लिया। मूर्ति टोला, ब्रह्मस्थान, बाजार, बाबूडीह, रामगढ़, टंडवा, बहियार और आसपास के कई गांवों के घाटों पर व्रतियों की भीड़ रही।

पूजा के दौरान महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका भगवान के साथ चील-सियार से जुड़ी पारंपरिक कथा सुनी। शाम में कई घाटों पर लोकगीत और झूमर की गूंज सुनाई दी। महिलाओं ने समूह में झूमर गाकर और नृत्य कर पर्व की परंपराओं को आगे बढ़ाया।

व्रती महिलाओं के अनुसार, यह उपवास संतान के स्वस्थ, सुखी और लंबे जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। चौबीस घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास रखने के बाद रविवार को पारण के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन होगा।