पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित सोनारपाड़ा सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में इस वर्ष भी सामुदायिक भागीदारी के साथ दुर्गा पूजा की तैयारी की गई है। गांव के बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार, इस स्थान पर लगभग 121 वर्षों से अधिक समय से पूजा-अर्चना होती आ रही है। यह मंदिर महेशपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर, पश्चिम बंगाल की सीमा के पास स्थित है।
सोनारपाड़ा की पूजा की प्रमुख विशेषता इसमें अलग-अलग समुदायों की भागीदारी है। गांव के लोग आपसी सहयोग से आयोजन करते हैं। लंबे समय से चली आ रही यह परंपरा स्थानीय निवासियों के लिए धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सहभागिता का अवसर भी बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल की सीमा के निकट होने के कारण यहां की पूजा पद्धति और आयोजन में बंगाली संस्कृति की झलक दिखाई देती है। मंदिर में वैष्णव मत के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है और बलि की प्रथा नहीं है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर माता के चरणों में वस्त्र तथा सोने-चांदी से बने आभूषण अर्पित करते हैं।
मंदिर के निर्माण में भी श्रद्धालुओं का सहयोग रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, नुड़ाई गांव के रामरंजन सरकार ने मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी थी। सोनारपाड़ा और आसपास के गांवों के श्रद्धालु इस पूजा स्थल के प्रति गहरी आस्था रखते हैं।
रोजगार या अन्य कामों के कारण गांव से बाहर रहने वाले कई लोग भी दुर्गा पूजा के अवसर पर सोनारपाड़ा लौटते हैं। इस दौरान वे मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। इससे पर्व के समय गांव में पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों के साथ बाहर रहने वाले परिवारों की सहभागिता भी बढ़ जाती है।
पूजा समिति ने इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी है। वर्ष 2026 की समिति में मीठू माल अध्यक्ष, सुभाष चंद्र मंडल सचिव और राजीव दत्ता कोषाध्यक्ष हैं। समिति आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं पर नजर रखेगी।