गढ़वा में दानरो नदी के किनारे ठोस कचरा डालने और उसे खुले में जलाने की शिकायत की जांच के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित संयुक्त समिति ने मंगलवार को स्थल निरीक्षण किया। समिति के सदस्यों ने मौके पर कचरा प्रबंधन से जुड़ी स्थिति देखी। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी जाएगी।
यह जांच एनजीटी की प्रधान पीठ, कोलकाता में दर्ज ओए संख्या 361/2026 से संबंधित है। अधिकरण ने 4 अगस्त 2026 के आदेश के तहत झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति बनाई थी। समिति को शिकायतों की वास्तविक स्थिति जांचने और आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने का निर्देश दिया गया है।
निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता विकास कुमार राय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर बड़ाईक, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार और शिकायतकर्ता दीपक शर्मा समेत अन्य लोग उपस्थित थे। अधिकारियों के अनुसार समिति मौके से मिले तथ्यों की समीक्षा कर रही है। नगर परिषद ने बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन के लिए चारदीवारी का काम पूरा हो चुका है और आगे की प्रक्रिया जारी है।
शिकायतकर्ता ने मांग की कि जांच केवल वर्तमान कचरे तक सीमित न रहे। उनके आवेदन में पुराने कचरे, पूर्व की डंपिंग, खुले में कचरा जलाने तथा नदी और आसपास के पर्यावरण पर संभावित असर की पड़ताल करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने नदी के ऊपरी और निचले हिस्से से पानी के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग भी रखी।
आवेदन में डंपिंग स्थल, नदी तल, आसपास की मिट्टी और तलछट की जरूरत के अनुसार जांच कराने को कहा गया है। शिकायतकर्ता ने कचरे के पृथक्करण, घर-घर संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण से जुड़े अभिलेखों के सत्यापन की भी मांग की। उनका आरोप है कि नदी किनारे कचरा डाला जाता रहा है, जबकि शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर निस्तारण की व्यवस्था बताई गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार प्रस्तावित जांच क्षेत्र के लगभग 200 मीटर के दायरे में चार निजी और एक सरकारी विद्यालय हैं। उन्होंने खुले में कचरा जलाने से निकलने वाले धुएं के संभावित प्रभाव को भी जांच के दायरे में रखने का आग्रह किया है। समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही शिकायतों की स्थिति और आगे उठाए जाने वाले कदम स्पष्ट होंगे।