रांची: झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में राज्य की कृषि प्राथमिकताएं रखीं। उन्होंने कहा कि झारखंड की भौगोलिक, सामाजिक और कृषि परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं, इसलिए केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लचीलापन और विशेष सहयोग जरूरी है।
मंत्री ने एग्रीस्टेक के तहत किसान आईडी बनाने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, पुराने भूमि अभिलेखों और वर्तमान जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में अंतिम व्यापक भूमि सर्वेक्षण 1932 में हुआ था और इसी विशिष्ट परिस्थिति को ध्यान में रखकर केंद्र से समाधान की मांग की गई है।
सम्मेलन में झारखंड के दलहन क्षेत्र के विस्तार की सराहना भी की गई। कृषि मंत्री ने बताया कि रबी मौसम में राज्य के पास लगभग 12 लाख हेक्टेयर धान परती क्षेत्र उपलब्ध रहता है। इसमें अनुमानित पांच से छह लाख हेक्टेयर भूमि को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के दायरे में लाने की क्षमता है।
राज्य सरकार ने इन धान परती क्षेत्रों के बड़े पैमाने पर विकास के लिए विशेष वित्तीय और तकनीकी पैकेज मांगा। मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने के लिए बैंकों द्वारा लक्ष्य आधारित अभियान चलाने और किसानों की संस्थागत कृषि ऋण तक पहुंच बेहतर करने का आग्रह भी किया।
छोटे, सीमांत और आदिवासी किसानों की संख्या का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने झारखंड जैसे राज्यों में कृषि यंत्रों पर सहायता को पात्र इकाई लागत के 90 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार करने की मांग की, ताकि आधुनिक कृषि तकनीक अधिक किसानों तक पहुंच सके।
मंत्री ने रांची के पलांडू स्थित फार्म रिसर्च सेंटर को बागवानी और आदिवासी कृषि प्रणालियों के राष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी दिया। सम्मेलन के दौरान उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री को झारखंड आने का निमंत्रण दिया, जिसे स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई। उनका कहना था कि राज्य की कृषि को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना होगा।