गढ़वा में 78 दिनों में सर्पदंश के 435 मामले, अस्पतालों में प्रतिदिन पहुंच रहे करीब छह मरीज

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जुलाई से 16 सितंबर तक गढ़वा में सर्पदंश के 435 मरीज अस्पताल पहुंचे। विभाग ने झाड़-फूंक से बचने और तत्काल अस्पताल जाने की अपील की है।

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गढ़वा में बरसात और खेती के मौसम के दौरान सर्पदंश से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट

गढ़वा जिले में बरसात और धान की खेती के मौसम के बीच सर्पदंश के मामले चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से 16 सितंबर तक 78 दिनों में 435 लोग सांप के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। इस अवधि का दैनिक औसत 5.6 है, यानी जिले में हर दिन करीब छह मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार जुलाई में सर्पदंश के 187 मामले दर्ज हुए। इनमें 75 पुरुष और 112 महिलाएं थीं। अगस्त में कुल 179 मरीज अस्पताल पहुंचे, जिनमें 87 पुरुष और 92 महिलाएं शामिल थीं। सितंबर के शुरुआती 16 दिनों में 69 मामले सामने आए हैं। इसी महीने सर्पदंश से तीन लोगों की मौत होने की जानकारी भी दी गई है।

जुलाई और अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि इन दो महीनों में 204 महिलाएं और 162 पुरुष सर्पदंश का शिकार हुए। इस तरह पुरुषों की तुलना में 42 अधिक महिलाओं को अस्पताल ले जाना पड़ा। विभाग ने मामलों में वृद्धि को बारिश और खेतों में जारी कृषि कार्यों से जुड़े खतरे के संदर्भ में रखा है।

धान की रोपाई, निकाई-गुड़ाई और दूसरे कृषि कार्यों के दौरान किसान तथा मजदूर खेत, मेड़ और आसपास के स्थानों पर सांपों के संपर्क में आ सकते हैं। बारिश में सांपों के बिलों से बाहर निकलने के कारण ग्रामीण इलाकों में सावधानी की जरूरत बढ़ जाती है। खेत में जाते समय जूते या अन्य सुरक्षा साधन इस्तेमाल करने और रात में बिना रोशनी के बाहर नहीं जाने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या पारंपरिक उपचार में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है। जहरीले सांप के काटने की स्थिति में उपचार में देरी जानलेवा साबित होने की आशंका रहती है। ऐसे में मरीज को शांत रखते हुए बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक स्वास्थ्य गौरव कुमार के अनुसार, जिले के अस्पतालों में सर्पदंश के इलाज के लिए एंटी वेनम उपलब्ध है। विभाग लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने और सीधे चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूक कर रहा है। घर और खेत के आसपास झाड़ियों तथा कचरे की नियमित सफाई करने की भी सलाह दी गई है।