गढ़वा शहर में आवारा कुत्तों और मवेशियों के लिए अब तक शेल्टर होम नहीं बन सका है। नगर परिषद क्षेत्र की सड़कों, चौक-चौराहों और मोहल्लों में इनके झुंड दिखाई दे रहे हैं। शहर में कुत्तों के काटने के बाद औसतन प्रतिदिन 30 से 35 लोग इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस हिसाब से ऐसे मरीजों की मासिक संख्या एक हजार से अधिक हो रही है।
नगर परिषद के पिछले सर्वे में शहर में 1,110 आवारा कुत्तों की पहचान की गई थी। इसके बाद द केयर ऑफ एनिमल सोसाइटी ने उनकी नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चलाया। संस्था के अनुसार, जिला मुख्यालय में अब तक 810 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।
नसबंदी के बाद कुत्तों को रखने के लिए कोई शेल्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा शहर में ही छोड़ना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के प्रयास का प्रभाव सीमित रहा है। नगर परिषद की ओर से शेल्टर की व्यवस्था नहीं होने के पीछे संसाधनों की कमी बताई जा रही है।
शहर में अब फीडिंग जोन बनाने के लिए स्थान चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रस्तावित जगहों में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, प्रखंड कार्यालय परिसर, हनुमान नगर, कचहरी, रंका मोड़, मिनी बस स्टैंड और कर्बला मैदान शामिल हैं। योजना के अनुसार इन स्थानों पर आवारा कुत्तों के भोजन की व्यवस्था की जानी है।
रंका मोड़ चौक, सदर अस्पताल परिसर, चिनियां रोड, दानरो नदी के श्मशान घाट और सोनपुरवा बस स्टैंड के आसपास बड़ी संख्या में कुत्तों के झुंड देखे जाने की बात सामने आई है। कुछ स्थानों पर दिन में भी लोगों पर हमले की शिकायतें मिलती हैं। सड़कों पर घूमते मवेशियों के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
महामारी नियंत्रक संतोष मिश्रा के अनुसार, कुत्ते के काटने की घटनाएं जनवरी से मार्च के बीच अधिक सामने आती हैं। उन्होंने काटे गए स्थान को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह धोने तथा चिकित्सकीय सलाह लेकर समय पर एंटी-रेबीज टीका लगवाने की सलाह दी है।