धनबाद के एसएनएमएमसीएच की इमरजेंसी में वेंटिलेटर का इस्तेमाल रुका, गंभीर मरीज हो रहे रेफर

एसएनएमएमसीएच की इमरजेंसी में उपलब्ध वेंटिलेटरों का फिलहाल उपयोग नहीं हो रहा है। सांस संबंधी गंभीर स्थिति वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी जा रही है।

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धनबाद स्थित एसएनएमएमसीएच अस्पताल की इमरजेंसी का सांकेतिक दृश्य

धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) की इमरजेंसी में गंभीर मरीजों को फिलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में मशीनें मौजूद होने के बावजूद उनका इस्तेमाल रोका गया है। इससे तत्काल श्वसन सहायता की जरूरत वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजने की स्थिति बन रही है।

गुरुवार को बरवाअड्डा से गंभीर हालत में एक मरीज को अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मरीज को तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता थी, लेकिन वहां इसका उपयोग नहीं किया जा सका। इसके बाद परिजनों को मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई।

बताया गया है कि इमरजेंसी में वेंटिलेटर मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी तकनीकी स्थिति और जरूरी रखरखाव से जुड़े कारणों के चलते फिलहाल उन्हें मरीजों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। किसी जीवनरक्षक मशीन का उपयोग शुरू करने से पहले उसका सुरक्षित और पूरी तरह कार्यशील होना जरूरी है। इसलिए तकनीकी जांच और मेंटेनेंस पूरा होने तक संचालन रुका हुआ है।

एसएनएमएमसीएच में धनबाद के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सांस लेने में अत्यधिक परेशानी या अन्य गंभीर परिस्थितियों में वेंटिलेटर की जरूरत तत्काल पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में सुविधा उपलब्ध नहीं रहने पर मरीज को दूसरी जगह ले जाना पड़ रहा है।

रेफर किए जाने से मरीजों के परिजनों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो रही है। उन्हें एक ओर वैकल्पिक अस्पताल में इलाज का प्रबंध करना पड़ता है, वहीं गंभीर अवस्था में मरीज को सुरक्षित तरीके से वहां तक पहुंचाने की चिंता भी रहती है। दूसरे संस्थान में उपचार कराने से अतिरिक्त खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है।

अस्पताल में उपलब्ध मशीनों की तकनीकी जांच और आवश्यक रखरखाव कब तक पूरा होगा, इसकी स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। गंभीर मरीजों की जरूरत को देखते हुए वेंटिलेटरों को जांच के बाद सुरक्षित रूप से जल्द संचालन में लाना जरूरी है, ताकि इमरजेंसी पहुंचने वाले लोगों को अस्पताल में ही आवश्यक जीवनरक्षक सहायता मिल सके।