मुसाबनी के बोगासुतली में सड़क नहीं, गर्भवती को खटिया पर दो किलोमीटर ले गए ग्रामीण

बोगासुतली टोला तक चार पहिया वाहन नहीं पहुंच सका। ग्रामीण गर्भवती महिला को पहाड़ी रास्ते से मुख्य सड़क तक लाए, जहां से ममता वाहन ने उन्हें केंदाडीह सीएचसी पहुंचाया।

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मुसाबनी के बोगासुतली टोला में गर्भवती महिला को खटिया से मुख्य सड़क तक ले जाते ग्रामीण

पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड के बोगासुतली टोला में सड़क की कमी एक गर्भवती महिला के लिए गंभीर परेशानी बन गई। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद चार पहिया वाहन टोला तक नहीं पहुंच सका। ऐसे में ग्रामीण महिला को खटिया पर लेकर करीब दो किलोमीटर दूर गुमड़ीबेड़ा सड़क तक पहुंचे।

बोगासुतली पहाड़ पर बसा टोला है, जहां करीब नौ आदिवासी परिवार रहते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ओड़िया सिंकू की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने सहायता जुटाने की कोशिश की। इलाके में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण तत्काल संपर्क करने में भी कठिनाई हुई।

परिजनों ने पहाड़ पर चढ़कर मुखिया पोरेमा बानरा को फोन किया। इसके बाद मुखिया ने एएनएम पूर्वी महाली और सहिया दामिनी टोपनो को सूचना देकर ममता वाहन की व्यवस्था कराई। चिंता सिंकू, बिंदु सिंकू और लखीसर भूमिज सहित अन्य ग्रामीण सुबह करीब साढ़े छह बजे महिला को खटिया पर लेकर टोला से निकले।

ग्रामीण पहाड़ी रास्ते से महिला को गुमड़ीबेड़ा सड़क तक लाए, जहां ममता वाहन पहले से मौजूद था। वाहन से उन्हें केंदाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकीय निगरानी में एएनएम ने प्रसव कराया और महिला ने स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।

मुखिया के अनुसार, ग्रामीण बोगासुतली तक सड़क बनवाने के लिए कई बार आवेदन दे चुके हैं। पांच फरवरी 2026 को दलमाबेड़ा में आयोजित तत्कालीन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के जनता दरबार में भी यह मांग रखी गई थी। सड़क निर्माण के लिए हाल में इंजीनियरों ने मापी की, लेकिन काम अभी शुरू नहीं हुआ है।

मानकी मुंडा संघ ने भी मंत्री दीपक बिरुआ से मुलाकात कर बोगासुतली और पंचायत के अन्य गांवों एवं टोलों में सड़क निर्माण की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग नहीं होने से चिकित्सा जैसी आपात परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।