रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने गांजा तस्करी से जुड़े एक मामले में आरोपी रवींद्र कुमार सिंह उर्फ राजू को जमानत दे दी है। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करते हुए कहा कि आरोपी को दोषी मानने के लिए पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं हैं। उसके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक इतिहास दर्ज नहीं होने को भी जमानत पर निर्णय करते समय ध्यान में रखा गया।
रवींद्र कुमार सिंह के विरुद्ध नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वह ओडिशा से झारखंड और बिहार तक गांजे की तस्करी करने वाले एक सिंडिकेट का सदस्य था। यह अभियोजन का आरोप है और मामले का अंतिम निर्णय अभी अदालत में होना बाकी है।
इस प्रकरण में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने सह-आरोपियों राजेश कुमार, दीपक कुमार प्रसाद और प्रफुल्ल पांडेय को 135.2 किलोग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने रवींद्र को भी इस कथित नेटवर्क से जोड़ा था। आरोपी 14 जनवरी से जेल में बंद था।
बचाव पक्ष ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दलील दी कि रवींद्र को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। पक्ष का कहना था कि उसे कथित तस्करी से जोड़ने के लिए गुप्त सूचना और सह-आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयानों के अतिरिक्त कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। यह भी बताया गया कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, लेकिन गवाहों की गवाही शुरू नहीं हुई है।
एनसीबी ने अदालत में जमानत का विरोध किया। हालांकि सुनवाई के दौरान एजेंसी की ओर से यह स्वीकार किया गया कि आरोपी को मामले से जोड़ने वाला कोई अन्य साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि गुप्त सूचना का स्रोत केस डायरी या आरोपपत्र में दर्ज नहीं किया गया है।
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया है। जमानत का यह आदेश मुकदमे के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है; मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगी।