गिरिडीह के डुमरी में ताम्र अयस्क की खोज पूरी, सर्वे रिपोर्ट पर आगे की योजना बनेगी

डुमरी प्रखंड के बरगंडा क्षेत्र में ताम्र अयस्क की खोज का काम पूरा हो गया है। एमईसीएल ने सर्वे रिपोर्ट राज्य के भूतत्व विभाग को सौंप दी है।

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गिरिडीह के डुमरी क्षेत्र में ताम्र अयस्क सर्वेक्षण से जुड़ा स्थल

गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में ताम्र अयस्क की खोज का काम पूरा हो गया है। भूतत्व सर्वेक्षण में बरगंडा क्षेत्र के करीब एक वर्ग किलोमीटर दायरे में इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। जमीन के भीतर से अयस्क के नमूने भी निकाले गए हैं। सर्वे की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार अब उसका अध्ययन कर आगे की कार्ययोजना पर विचार करेगी।

सर्वेक्षण के दायरे में बरगंडा के साथ परसाबेड़ा, कोलुवा और अंबाडीह गांव का उल्लेख किया गया है। क्षेत्र में ताम्र अयस्क होने का प्रारंभिक संकेत झारखंड सरकार के भूतत्व विभाग को वर्ष 2018 में मिला था। सतह से लिए गए नमूनों की हजारीबाग स्थित प्रयोगशाला में जांच के दौरान तांबा, जिंक और लेड के अंश पाए गए थे।

इसके बाद छोटानागपुर के उप निदेशक कुणाल कौशल को परियोजना प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई। तीन स्थानों पर गहराई तक ड्रिलिंग करने पर उच्च गुणवत्ता का ताम्र अयस्क मिलने की जानकारी सामने आई। विस्तृत सर्वेक्षण पूरा करने का दायित्व केंद्र सरकार के उपक्रम मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड को दिया गया था। संस्थान ने हाल में अपनी रिपोर्ट राज्य के भूतत्व विभाग को सौंप दी है।

झारखंड में तांबे के खनन का पुराना केंद्र पूर्वी सिंहभूम का मुसाबनी रहा है, जहां खदान की खोज ब्रिटिश शासन के दौरान 1923 में हुई थी। बाद में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड को मुसाबनी में अयस्क निकालने और मऊभंडार में उसके प्रसंस्करण की जिम्मेदारी मिली। बरगंडा क्षेत्र में भी ताम्र अयस्क के संकेत पहले मिले थे, लेकिन उस समय सर्वेक्षण पूरा नहीं हो सका था।

राज्य के भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ के अनुसार, बरगंडा में कई वर्षों के सर्वेक्षण के बाद खोज का काम पूरा हुआ है और विभाग को रिपोर्ट मिल गई है। अभी खनन शुरू होने की कोई समयसीमा नहीं बताई गई है। रिपोर्ट के अध्ययन और आगे की सरकारी प्रक्रिया के बाद ही क्षेत्र को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा।