गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड की नेकपुरा पंचायत में कम बारिश के कारण खरीफ की खेती गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। स्थानीय किसानों के मुताबिक, पंचायत की सिंचित भूमि के 15 प्रतिशत से भी कम हिस्से में धान की रोपाई हो सकी। अब उन्होंने प्रशासन और कृषि विभाग से फसलों की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराकर पात्र किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की है।
देवपहाड़ी, नेकपुरा, मकडीहा, बिलोटांड़, जलखरियोडीह, ढेंगा और बजलुडीह के किसानों का कहना है कि धान की बुआई के बाद रोपाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला। कई खेतों में तैयार बिचड़े रोपाई से पहले ही खराब हो गए। बारिश के इंतजार में रोपाई का उपयुक्त समय निकलने से बिचड़ा तैयार करने पर हुआ खर्च भी नुकसान में बदल गया।
धान की खेती प्रभावित होने के बाद किसानों ने मूंग, मड़ुआ और मक्का जैसी वैकल्पिक खरीफ फसलें अपने स्तर पर लगाईं। उनका कहना है कि कृषि विभाग की ओर से वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन पंचायत के किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने दूसरी फसलों के सहारे नुकसान कम करने की कोशिश की।
किसानों के अनुसार, कटाई के समय हुई मूसलाधार बारिश ने वैकल्पिक खेती को भी नुकसान पहुंचाया। मूंग और मड़ुआ में फलियां आने के बाद हुई बारिश से दाने प्रभावित हुए, जबकि मक्का की फसल को भी क्षति पहुंची। इस तरह पहले धान की रोपाई रुकने और फिर दूसरी फसलों को नुकसान होने से उनकी मुश्किल बढ़ गई है।
प्रभावित किसानों ने आगामी रबी मौसम के लिए उड़द, सरसों, कुरथी, चना और गेहूं के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उन्होंने आवश्यक उर्वरक की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया है। किसानों का मानना है कि समय रहते सहायता मिलने पर वे खरीफ में हुए नुकसान की कुछ भरपाई कर सकेंगे।
देवरी के कृषि पदाधिकारी संजय कुमार साहू ने नेकपुरा पंचायत में धान की रोपाई का आकलन कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि रबी फसलों के बीज का आवंटन मिलने के बाद नेकपुरा के किसानों को प्राथमिकता के आधार पर बीज उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों ने अब आकलन और सहायता की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की उम्मीद जताई है।