दुमका में बढ़ा चॉकलेट का बाजार, डॉक्टरों ने सीमित सेवन और लेबल जांचने की दी सलाह

दुमका में चॉकलेट का मासिक कारोबार पांच से छह करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा है। चिकित्सकों ने खासकर बच्चों के लिए संतुलित आहार, दांतों की सफाई और उत्पाद का लेबल देखने पर जोर दिया है।

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दुमका के बाजार में बिक्री के लिए रखी गई विभिन्न प्रकार की चॉकलेट

दुमका में चॉकलेट अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि उपहार देने और खुशी या दूसरी भावनाएं व्यक्त करने का लोकप्रिय माध्यम भी बन रही है। स्थानीय वितरकों के मुताबिक जिले में इसका मासिक कारोबार पांच से छह करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। फिल्मों, विज्ञापनों और बदलती जीवनशैली को इसकी बढ़ती स्वीकार्यता से जोड़कर देखा जा रहा है।

बाजार के विस्तार के बीच चिकित्सकों ने उपभोक्ताओं को मात्रा और उत्पाद की सामग्री पर ध्यान देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि चॉकलेट खरीदते समय पैकेट पर कोको, चीनी, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी से संबंधित जानकारी पढ़नी चाहिए। अधिक चीनी और वसा वाले उत्पादों का लगातार सेवन वजन बढ़ने जैसी समस्या से जुड़ सकता है।

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकिता सिंह के अनुसार अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स पाए जाते हैं, जिन्हें हृदय के लिए लाभकारी माना जाता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की चॉकलेट का सीमित सेवन ही बेहतर विकल्प है। केवल डार्क चॉकलेट का नाम देखकर मात्रा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

दंत चिकित्सक डॉ. श्वेता स्वराज ने बताया कि मीठी चीजें बार-बार खाने से दांतों में कैविटी का जोखिम बढ़ता है। उनके अनुसार चॉकलेट या अन्य मिठाई खाने के बाद मुंह और दांतों की अच्छी तरह सफाई जरूरी है। बच्चों के नियमित भोजन में फल, दाल और दूसरी पौष्टिक चीजों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार दास ने बच्चों को हर बार रोने पर या अच्छे अंक मिलने पर चॉकलेट देने की आदत को लेकर सावधानी बरतने को कहा है। ऐसी आदत रोज की मांग में बदल सकती है और बच्चा दूध, फल तथा दाल जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने लग सकता है।

दुमका के बाजार में बढ़ती बिक्री उपहार संस्कृति और उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलाव को दिखाती है। चिकित्सकीय राय का साझा संदेश यह है कि खरीदारी के समय सामग्री की जानकारी देखी जाए, बच्चों के संतुलित भोजन से समझौता न हो और चॉकलेट को रोजमर्रा के मुख्य आहार के बजाय सीमित मात्रा में लिया जाए।