गिरिडीह के लंकास्टर अस्पताल परिसर में भू-धंसान जारी, कई भवन क्षतिग्रस्त

सीसीएल गिरिडीह कोलियरी के लंकास्टर अस्पताल परिसर में भू-धंसान से कई भवन क्षतिग्रस्त हो गए। प्रबंधन शेष परिवारों को सुरक्षित आवासों में स्थानांतरित कर रहा है।

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गिरिडीह के लंकास्टर अस्पताल परिसर में भू-धंसान से क्षतिग्रस्त भवन

गिरिडीह में सीसीएल कोलियरी स्थित लंकास्टर अस्पताल परिसर में भू-धंसान का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। शनिवार रात शुरू हुई इस घटना के बाद अस्पताल परिसर के कई अन्य भवन क्षतिग्रस्त होकर गिर गए। एक कर्मचारी का मकान भी ढहने की जानकारी सामने आई है। लगातार बदल रही स्थिति के कारण परिसर में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों में चिंता बनी हुई है।

रविवार सुबह अस्पताल भवन की दीवारों में दरारें बढ़ने लगीं और प्लास्टर के हिस्से टूटकर गिरने लगे। इसके बाद परिसर के कुछ भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। खतरे को देखते हुए कई परिवार अपने क्वार्टर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

घटना की सूचना मिलने पर गिरिडीह एरिया के महाप्रबंधक कन्हैया शंकर गेवाल ने मौके का निरीक्षण किया। अस्पताल के आसपास इससे पहले भी ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं। करीब एक महीने पहले इसी परिसर में भू-धंसान के कारण अस्पताल के तीन भवन गिर गए थे। उस घटना के बाद प्रबंधन ने परिसर की घेराबंदी कर कर्मचारियों को दूसरे स्थान पर जाने का निर्देश दिया था।

जिला प्रशासन ने भी हाल में इस क्षेत्र का जायजा लिया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उपायुक्त रामनिवास यादव ने 23 सितंबर को सीसीएल क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान रीजनल हॉस्पिटल के पास भू-धंसान स्थल को देखा था। उस समय अधिकारियों ने क्षेत्र में पूर्व में हुई अवैध खनन गतिविधियों और उनसे बने भूमिगत खाली स्थानों का उल्लेख किया था।

भू-धंसान के कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। प्रकाशित विवरण में इसे पुराने अवैध खनन और भूमिगत खाली स्थानों से जोड़कर देखा गया है। ऐसे संवेदनशील हिस्सों की पहचान करके उन्हें भरने के प्रयास किए जाने की बात भी कही गई है। फिलहाल प्रबंधन का ध्यान प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने और वहां रह रहे लोगों को हटाने पर है।

गिरिडीह कोलियरी के परियोजना पदाधिकारी जीएस मीणा के अनुसार, पहले की घटना के बाद कई लोग आवंटित सुरक्षित आवासों में स्थानांतरित हो चुके हैं। शेष परिवारों को भी सुरक्षित जगह भेजा जा रहा है। घटनास्थल की घेराबंदी के साथ सुरक्षा गार्ड तैनात किया गया है, ताकि क्षतिग्रस्त भवनों और धंसती जमीन के पास अनावश्यक आवाजाही रोकी जा सके।