गिरिडीह में वर्ष 2008 के निमियाघाट मुठभेड़ मामले में वांछित दो आरोपियों ने सोमवार को अदालत में आत्मसमर्पण किया। उनकी पहचान सीताराम सोरेन और पवन कुमार मुर्मू उर्फ शिवलाल मुर्मू के रूप में बताई गई है। दोनों को माओवादी संगठन से जुड़ा आरोपी बताया गया है।
दोनों आरोपी जिला जज प्रथम कंवलजीत चौपड़ा की अदालत में उपस्थित हुए। आत्मसमर्पण के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। यह मामला लगभग 18 वर्ष पहले निमियाघाट थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ से संबंधित है।
मामले की प्राथमिकी तत्कालीन पुलिस अधिकारी अहमद अली ने दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के मुताबिक, सात अगस्त 2008 को उत्तरी छोटानागपुर बंद के आह्वान के बीच रेलवे ट्रैक, जीटी रोड और अन्य संवेदनशील स्थानों पर पुलिस गश्त की जा रही थी। सुरक्षाबलों को माओवादी दस्ते द्वारा किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की आशंका की सूचना मिली थी।
दर्ज विवरण के अनुसार, रात करीब 11 बजे लक्ष्मण टुंडा के पास एक पुलिया के निकट घात लगाए दस्ते ने पुलिस दल पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। इसके बाद दोनों ओर से फायरिंग हुई। इस दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान राम सिंह धामी और कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह गोली लगने से घायल हुए थे। बाद में इलाज के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई थी।
मुठभेड़ को लेकर दर्ज मामले में सीताराम सोरेन और पवन कुमार मुर्मू को वांछित आरोपी बताया गया था। मामले में पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी होने और कुछ के आत्मसमर्पण करने की जानकारी दी गई है। कथित नेतृत्वकर्ता नवीन मांझी भी इसी मामले में जेल में बंद बताया गया है।
दोनों आरोपियों के अदालत में आत्मसमर्पण के बाद अब उनके विरुद्ध दर्ज मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल अदालत के आदेश पर दोनों को जेल भेज दिया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के तहत होगा।