झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के मानगो थाने से जुड़े एक मामले में न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है। उस पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है। अदालत का यह आदेश जमानत के प्रश्न तक सीमित है और आरोपों पर मुकदमे की सुनवाई आगे जारी रहेगी।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने आरोपी सत्यजीत परमार उर्फ सनी उर्फ सत्यजीत सिंह परमार को रिहा करने का निर्देश दिया। इसके लिए उसे 25 हजार रुपये का जमानत बांड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे।
अदालत ने जमानत देते समय आरोपपत्र दाखिल होने और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर विचार किया। आरोपी करीब चार महीने से न्यायिक हिरासत में था। उसे 12 मई को हिरासत में भेजा गया था, जबकि पुलिस ने नौ जुलाई को आरोपपत्र दाखिल किया।
जमानत आदेश में आरोपी के लिए प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है। किसी सुनवाई से अनुपस्थित रहने की स्थिति में उसका जमानत बांड रद्द किया जा सकता है। उसे निचली अदालत में चलने वाली कार्यवाही में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।
आरोपी को अपना स्वप्रमाणित आधार कार्ड और मोबाइल नंबर अदालत में जमा करना होगा। मुकदमा लंबित रहने के दौरान वह अदालत की अनुमति के बिना अपना मोबाइल नंबर नहीं बदल सकेगा। ये शर्तें सुनवाई के दौरान उसकी उपलब्धता और अदालती प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई हैं।
यह मामला पूर्वी सिंहभूम जिले के मानगो थाना क्षेत्र से संबंधित है। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है; मामले में आरोपों और साक्ष्यों का अंतिम निर्धारण संबंधित निचली अदालत की आगे की सुनवाई में होगा।