गिरिडीह जिले में किसानों की उपज सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाए गए 23 सौर ऊर्जा आधारित मिनी कोल्ड स्टोरेज अब तक चालू नहीं हो सके हैं। इन केंद्रों का निर्माण वर्ष 2024 में सहकारिता विभाग ने पैक्स के माध्यम से कराया था। निर्माण पर कुल 4.24 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन डेढ़ से दो वर्ष गुजरने के बाद भी केंद्रों पर ताले लगे हैं।
जिले में तीन अलग-अलग क्षमताओं के कोल्ड स्टोरेज बनाए गए हैं। पांच मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ केंद्रों पर 64 लाख रुपये और दस मीट्रिक टन क्षमता वाले दस केंद्रों पर 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त 30 मीट्रिक टन क्षमता वाले पांच केंद्र दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए हैं।
ये केंद्र गांडेय, सरिया, बेंगाबाद, धनवार, गिरिडीह, देवरी, डुमरी, जमुआ, पीरटांड़ और बगोदर समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित हैं। इनका उद्देश्य टमाटर, पत्तेदार सब्जियों तथा जल्दी खराब होने वाली दूसरी उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रखना था, ताकि किसानों को फसल बेचने के लिए बेहतर अवसर मिल सके।
कोल्ड स्टोरेज में सोलर पैनल से एसी और मोटर पंप चलाने की व्यवस्था है। ठंडे पानी के संचार के माध्यम से अंदर रखी उपज का तापमान नियंत्रित किया जाना है। हालांकि संचालन किस संस्था को सौंपा जाएगा, किसान किससे संपर्क करेंगे और भंडारण के लिए कितना शुल्क देना होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से सभी केंद्रों की मौजूदा स्थिति की भौतिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संचालन, नियंत्रण और शुल्क से जुड़ी व्यवस्था सार्वजनिक करने को भी कहा है। किसानों का कहना है कि सुविधाएं बंद रहने से तैयार बुनियादी ढांचे का लाभ खेती और उपज के संरक्षण में नहीं मिल पा रहा है।
जिला सहकारिता पदाधिकारी कुमार गौतम के अनुसार, इन कोल्ड स्टोरेज का निर्माण राज्य स्तर पर सहकारिता विभाग ने सभी जिलों में कराया है और विभाग को बंद केंद्रों की जानकारी है। उन्होंने बताया कि रांची की एक टीम निरीक्षण कर चुकी है। उम्मीद है कि टेंडर के बाद निजी कंपनियों को इनके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।