झारखंड में खनिज ब्लॉकों के विकास के लिए नई नीति मंजूर, अन्वेषण के आधार पर बनेंगी श्रेणियां

राज्य मंत्रिपरिषद ने खनिज ब्लॉकों के अन्वेषण, विकास और खनन के लिए नई नीति को स्वीकृति दी है। ब्लॉकों की स्थिति और जोखिम के अनुसार संचालन मॉडल तय किया जाएगा।

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झारखंड मंत्रिपरिषद ने खनिज ब्लॉकों के अन्वेषण, विकास और खनन कार्यों के व्यवस्थित संचालन के लिए झारखंड मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड ब्लॉक डेवलपमेंट पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के इस प्रस्ताव पर स्वीकृति दी गई।

नई नीति के तहत उपलब्ध भूवैज्ञानिक जानकारी के आधार पर खनिज ब्लॉकों को दो श्रेणियों में रखा जाएगा। इनमें आंशिक रूप से अन्वेषित और पूर्ण रूप से अन्वेषित ब्लॉक शामिल होंगे। यह वर्गीकरण संबंधित ब्लॉक के बारे में पहले से उपलब्ध आंकड़ों और उसकी भूवैज्ञानिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

प्रत्येक ब्लॉक के संचालन का मॉडल उसकी परियोजना अवधि, वित्तीय जरूरत, तकनीकी तथा वाणिज्यिक जोखिम और व्यावसायिक उत्पादन की संभावना के आधार पर चुना जाएगा। इसके लिए ब्लॉक लाइफसाइकल एसेसमेंट और प्रोजेक्ट लाइफसाइकल प्लान तैयार करने की व्यवस्था भी नीति में रखी गई है।

इस नीतिगत ढांचे का उपयोग झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड, झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड और अन्य सरकारी संस्थाओं को प्राप्त या आवंटित खनिज ब्लॉकों के विकास एवं संचालन में किया जाएगा। इसका उद्देश्य इन संस्थाओं के लिए पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया स्थापित करना है।

नीति के माध्यम से अन्वेषण, विकास और खनन के अलग-अलग चरणों के बीच होने वाले अनावश्यक विलंब को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों के उचित आवंटन के साथ प्रतिस्पर्धी तथा पारदर्शी खरीद प्रक्रिया को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है।

स्वीकृत व्यवस्था में राज्य के वित्तीय और रणनीतिक हितों की रक्षा पर भी जोर है। तय नीति-ढांचे के भीतर संबंधित सरकारी संस्थाओं के निदेशक मंडल को अलग-अलग खनिज ब्लॉकों की परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।