गुमला के लोहड़ी गांव को सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार, ग्रामसभा संभालेगी जंगल की देखरेख

बसिया प्रखंड के लोहड़ी गांव में ग्रामसभा को जंगल की रक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली है। इसे गुमला जिले में अपनी तरह की पहली पहल बताया गया है।

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गुमला के लोहड़ी गांव में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार से जुड़ी पहल

गुमला जिले के बसिया प्रखंड की पोकटा पंचायत स्थित लोहड़ी गांव को सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार (सीएफआरआर) दिया गया है। इसके साथ ग्रामसभा को अपने सामुदायिक वन क्षेत्र की रक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन में सीधे भूमिका निभाने का अधिकार मिला है। उपलब्ध जानकारी में इसे जिले में इस तरह की पहली पहल बताया गया है।

बुधवार को लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत की मौजूदगी में ग्रामीणों को अधिकार पत्र सौंपा गया। लोहड़ी गांव को इससे पहले 47.23 एकड़ वन क्षेत्र पर सामुदायिक वन अधिकार मिल चुका था। इसके बाद ग्रामसभा ने वन संसाधन प्रबंधन समिति गठित कर प्रबंधन योजना तैयार की और उसे लागू करने की पहल शुरू की।

गांव में जंगल के पुनर्जीवन के लिए बीज गेंदों के माध्यम से बीज फैलाने और पौधरोपण जैसे काम भी किए गए हैं। नई व्यवस्था में ग्रामसभा, वन विभाग और जिला प्रशासन के समन्वय से संरक्षण संबंधी गतिविधियां आगे बढ़ाई जाएंगी। इसका उद्देश्य वन संपदा की देखरेख के साथ ग्रामीणों की वन आधारित आजीविका को मजबूत करना भी है।

सामुदायिक वन अधिकार और संसाधन प्रबंधन अधिकार की भूमिका अलग-अलग है। सामुदायिक वन अधिकार पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देता है, जबकि सीएफआरआर ग्रामसभा को वन संसाधनों की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपता है। विभागीय जानकारी के अनुसार, लकड़ी को छोड़कर अन्य वन उपज के प्रबंधन, बिक्री, नियमन, ट्रांजिट परमिट और जुर्माने से जुड़े अधिकार भी ग्रामसभा को मिलते हैं।

वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर के अनुसार, गांव की पूरी ग्रामसभा को यह अधिकार प्रदान किया गया है। उन्होंने इसे गुमला जिले का पहला मामला बताया। प्रबंधन संबंधी कार्यों के लिए कल्याण विभाग की ओर से धन उपलब्ध कराए जाने और अगले चरण में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई है।

इस प्रक्रिया में प्रदान संस्थान ने ग्रामीणों को वन अधिकारों की प्रक्रिया समझने, ग्रामसभा को मजबूत करने और प्रबंधन योजना बनाने में सहयोग दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुमला के 162 गांवों को 36,865.65 एकड़ वन क्षेत्र में सामुदायिक वन अधिकार पहले ही मिल चुका है। लोहड़ी में मिला नया अधिकार ग्रामसभा की जिम्मेदारी को संरक्षण से आगे बढ़ाकर व्यवस्थित प्रबंधन तक ले जाता है।