रांची में निर्माण कार्यों से फैलने वाली धूल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने सभी निर्माणाधीन भवनों तथा कंस्ट्रक्शन साइटों को ग्रीन शीट से ढकना अनिवार्य कर दिया है। नगर निगम ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों का पालन कराने और नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
यह निर्णय नगर आयुक्त सुशांत गौरव की अध्यक्षता में हुई सिटी लेवल इंप्लीमेंटेशन कमेटी की 12वीं बैठक में लिया गया। बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक किए गए कार्यों, उन पर हुए वित्तीय व्यय और योजनाओं की भौतिक प्रगति की समीक्षा की गई। शहर में प्रदूषण के प्रमुख कारणों और आगे अपनाए जाने वाले नियंत्रण उपायों पर भी चर्चा हुई।
नगर आयुक्त ने पेवर ब्लॉक लगाने, सड़कों की मरम्मत, पौधरोपण, शवदाह गृह और कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्यों को समेटते हुए एक सैचुरेशन प्लान तैयार करने को कहा है। यह योजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी जाएगी। हॉर्टिकल्चर शाखा को भी निगम क्षेत्र में उपयुक्त स्थान चिह्नित कर अधिकतम पौधरोपण सुनिश्चित करने का निर्देश मिला है।
वायु गुणवत्ता की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से रूट प्लान तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों को योजनाबद्ध तरीके से एकत्र करना है।
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की रांची इकाई से वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर निगम क्षेत्र के पांच सर्वाधिक प्रदूषित और पांच सबसे कम प्रदूषित स्थानों की पहचान करने को कहा गया है। इन स्थानों की रिपोर्ट नगर निगम को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय संबंधित क्षेत्रों की स्थिति के अनुसार तय किए जा सकें।
अधिकारियों ने दिन के अलग-अलग समय में पीएम10 के स्तर का आकलन करने का निर्देश भी दिया है। यह पता लगाया जाएगा कि शहर में किस समय पीएम10 का स्तर सबसे अधिक और किस समय सबसे कम रहता है। निर्माण स्थलों को ढकने, वैज्ञानिक निगरानी और क्षेत्रवार आंकड़ों के आधार पर नगर निगम ने वायु गुणवत्ता सुधार की आगामी कार्ययोजना आगे बढ़ाने की तैयारी की है।