गुमला में 32 हेक्टेयर में औद्योगिक बांस की खेती का लक्ष्य, किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण

राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत गुमला में निजी और सरकारी भूमि पर औद्योगिक बांस लगाने की तैयारी है। हाल में 14 किसानों और एक क्षेत्रीय कार्यकर्ता को पांच दिन का प्रशिक्षण दिया गया।

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गुमला में औद्योगिक बांस की खेती के लिए प्रशिक्षण लेते किसान

गुमला जिले में राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत औद्योगिक बांस की खेती बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 32 हेक्टेयर भूमि पर बांस लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। योजना का उद्देश्य खेती के साथ प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और बाजार से जुड़ने के अवसर विकसित कर किसानों की आमदनी के नए रास्ते खोलना है।

निर्धारित लक्ष्य में 24 हेक्टेयर निजी भूमि और आठ हेक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है। किसानों को उन्नत और कई प्रकार से उपयोगी बांस प्रजातियां अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिला उद्यान कार्यालय इस दिशा में प्रशिक्षण भी दे रहा है। हाल में 14 किसानों और एक क्षेत्रीय कार्यकर्ता ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण में भाग लिया।

उद्यान निदेशालय की ओर से नामित संस्था के प्रशिक्षकों कीर्तिमान नाथ, अंजीत उरांव और सुकरा उरांव ने प्रतिभागियों को पौधरोपण, पौधों की देखभाल, उन्नत प्रजातियों तथा बाजार की संभावनाओं से संबंधित जानकारी दी। प्रशिक्षण का जोर औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप उत्पादन और बांस के अलग-अलग उपयोग समझाने पर रहा।

बांस से फर्नीचर, हस्तशिल्प, घरेलू वस्तुएं और फाइबर आधारित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इसकी पत्तियां पशु चारे में इस्तेमाल होती हैं, जबकि कोपलों से सब्जी और अचार भी बनाए जाते हैं। ऐसे में खेती के अलावा प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पादों के माध्यम से भी आय की संभावना देखी जा रही है। मांग बढ़ने पर स्थानीय उद्यम और रोजगार के अवसर बन सकते हैं।

पर्यावरण की दृष्टि से भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ने वाला बांस वातावरण से कार्बन अवशोषित करने में सहायक होता है और इसके झुरमुट पक्षियों को प्राकृतिक आश्रय दे सकते हैं। हालांकि कार्बन क्रेडिट से आय स्वतः नहीं मिलेगी। इसके लिए किसानों को किसी निर्धारित परियोजना से जुड़ने, वैज्ञानिक आकलन कराने और स्वतंत्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत होगी।

छोटे किसानों के लिए किसान उत्पादक संगठन या परियोजना संचालक के माध्यम से सामूहिक भागीदारी अधिक व्यावहारिक हो सकती है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पौधरोपण और देखभाल के साथ उत्पादकों को प्रसंस्करण तथा बाजार तक कितना प्रभावी संपर्क मिलता है। लक्ष्य के अनुसार खेती आगे बढ़ने पर बांस गुमला की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त आय का आधार बन सकता है।