धनबाद के पूर्व विधायक और मजदूर नेता गुरुदास चटर्जी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे उमेश सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि उसे 12 नवंबर तक या उससे पहले हिरासत से मुक्त कर दिया जाएगा। उमेश करीब 26 वर्षों से जेल में बंद है।
मामले से जुड़ी अवमानना याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कारा महानिरीक्षक अदालत में उपस्थित हुए और सरकार की ओर से औपचारिक हलफनामा दाखिल किया। याचिका में हाईकोर्ट के पहले के आदेश का निर्धारित अवधि में पालन नहीं होने की शिकायत की गई थी।
न्यायमूर्ति अंबुज नाथ की एकल पीठ ने 17 नवंबर 2025 के फैसले में राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड के दो अस्वीकृति आदेश रद्द कर दिए थे। ये आदेश 19 फरवरी और 1 सितंबर 2025 को उमेश की समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर दिए गए थे। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर रिहाई का औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया था।
समय सीमा में निर्देश का पालन नहीं होने के बाद उमेश की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई। उसके अधिवक्ता के अनुसार, वह 27 अप्रैल 2000 से जेल में है और सजा पुनरीक्षण बोर्ड उसकी रिहाई का आवेदन तीन बार खारिज कर चुका था। बोर्ड ने मामले में उसकी भूमिका और रिहाई के संभावित सामाजिक प्रभाव का उल्लेख किया था।
गुरुदास चटर्जी की 14 अप्रैल 2000 को धनबाद में एक बैठक से निरसा लौटते समय गोविंदपुर क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। धनबाद सत्र न्यायालय ने नवंबर 2003 में उमेश सिंह सहित चार लोगों को दोषी ठहराया था। बाद में हाईकोर्ट ने उमेश और एक अन्य दोषी की उम्रकैद को मृत्युदंड में बदला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे फिर उम्रकैद कर दिया था।
गुरुदास चटर्जी निरसा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक थे। वर्तमान निरसा विधायक अरूप चटर्जी उनके पुत्र हैं। सरकार के ताजा हलफनामे के बाद अब अदालत के पुराने निर्देश के अनुपालन में उमेश की रिहाई की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जानी है।