गेतलसूद तैरती सौर परियोजना का संविदा भार 21 एमवीए से घटाकर 750 केवीए करने की मंजूरी

झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने गेतलसूद बांध पर स्थित 100 मेगावाट की तैरती सौर परियोजना के वास्तविक सहायक बिजली उपयोग के आधार पर संविदा भार घटाने की अनुमति दी है।

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रांची के गेतलसूद बांध की तैरती सौर ऊर्जा परियोजना का सांकेतिक दृश्य

रांची के गेतलसूद बांध जलाशय पर स्थित 100 मेगावाट क्षमता की तैरती सौर ऊर्जा परियोजना को संविदा भार के मामले में राहत मिली है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की याचिका स्वीकार करते हुए भार 21 एमवीए से घटाकर 750 केवीए करने की अनुमति दे दी है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नवनीत और सदस्य (विधि) महेंद्र प्रसाद की खंडपीठ ने इस संबंध में आदेश जारी किया।

इस परियोजना के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन के बीच समझौता हुआ था। परियोजना से बनने वाली बिजली की निकासी के लिए कंपनी ने अपने वित्तीय संसाधनों से 132 केवी क्षमता की अलग संचरण लाइन बनवाई। इस लाइन की अनुमानित लागत करीब 14 करोड़ रुपये बताई गई है।

शुरुआत में बिजली वितरण निगम ने उच्च तनाव श्रेणी में कंपनी के लिए 21 एमवीए संविदा भार स्वीकृत किया था। इसके अनुरूप निर्धारित सुरक्षा राशि भी जमा कराई गई। संयंत्र का परिचालन शुरू होने के बाद आंतरिक सहायक कामों के लिए केवल 750 केवीए बिजली की जरूरत सामने आई। इसी तकनीकी और व्यावहारिक आधार पर कंपनी ने भार घटाने की मांग की थी।

आयोग ने अपने निर्णय में 9 अगस्त 2025 की अधिसूचना संख्या 112 का उल्लेख किया है। इसमें तैरती सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अधिकतम सहायक बिजली खपत की सीमा 0.75 प्रतिशत तय की गई थी। 100 मेगावाट क्षमता के हिसाब से यह सीमा 750 केवीए बनती है, जिसे आयोग ने निर्धारित मानकों के अनुरूप माना।

समर्पित लाइन 132 केवी की होने और तकनीकी कारणों से इससे कम वोल्टेज स्तर पर आपूर्ति संभव नहीं होने के आधार पर विद्युत आपूर्ति संहिता, 2015 के नियम 4.7 के तहत विशेष अनुमति दी गई है। कंपनी ने लिखित रूप से कहा है कि लगातार 132 केवी पर बिजली मिलने के बावजूद वह भविष्य में किसी वोल्टेज छूट का दावा नहीं करेगी।

संयंत्र की सहायक खपत की गणना बिजली खरीद समझौते के नियम 6.5 के अनुसार कुल उत्पादित इकाइयों के मुकाबले नेट मीटरिंग पद्धति से होगी। रिएक्टिव पावर चार्ट के तहत देय राशि का निपटारा भी निर्धारित नियमों से किया जाएगा। आयोग ने बिजली वितरण निगम को आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर अनुबंध और सेवा कनेक्शन संबंधी दस्तावेजों में जरूरी संशोधन करने का निर्देश दिया है।