चांडिल से पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम को जोड़ने वाली प्रस्तावित नई रेललाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे शुरू हो गया है। परियोजना में 127 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग तैयार करने की योजना है। प्रस्तावित लाइन को रांची की ओर से आने वाली ट्रेनों के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने और मौजूदा रेल यातायात का दबाव कम करने की बात कही गई है।
उपलब्ध परियोजना विवरण के मुताबिक, रेल मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना को स्वीकृति देते हुए 343.97 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। अब फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए अलग से 3.81 करोड़ रुपये दिए गए हैं। तकनीकी टीम प्रस्तावित मार्ग का एलाइनमेंट और स्टेशनों के संभावित स्थान तय करने की प्रक्रिया में जुटी है।
सर्वे के दौरान ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों की सहायता से जमीन का अध्ययन किया जा रहा है। मिट्टी की जांच के साथ नदियों और नालों पर बनने वाले पुलों के संभावित स्थान भी चिह्नित किए जाएंगे। प्रस्तावित स्टेशनों के लिए जमीन की मापी करने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी।
फाइनल लोकेशन सर्वे का काम अगस्त 2027 तक चलने की जानकारी दी गई है। परियोजना से प्रभावित होने वाली रैयती और सरकारी जमीन का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है। इसमें झारखंड के सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिलों के साथ पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम क्षेत्र की जमीन शामिल है।
नई लाइन बनने पर चांडिल और नीमडीह के अलावा बोड़ाम, पटमदा, कटिन और बांदवान जैसे क्षेत्रों के कई गांवों को रेल संपर्क मिलने की संभावना बताई गई है। योजना का उद्देश्य चांडिल और झाड़ग्राम के बीच नया संपर्क उपलब्ध कराने के साथ दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ना है।
पूर्वी सिंहभूम के सांसद बिद्युत वरण महतो ने कहा है कि उन्होंने चांडिल से झाड़ग्राम तक नई रेललाइन की मांग रेल मंत्रालय के समक्ष रखी थी। उनके अनुसार, प्रस्तावित मार्ग से चांडिल के साथ बोड़ाम, पटमदा, कटिन और बांदवान जैसे ग्रामीण इलाके रेल सेवा से जुड़ सकेंगे। फिलहाल परियोजना फाइनल सर्वे के चरण में है।