रांची के गेतलसूद डैम पर स्थापित 100 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट से पूर्ण क्षमता पर बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (जरेडा) के निदेशक केके वर्मा के अनुसार, संयंत्र ने गांधी जयंती से पूरा उत्पादन आरंभ किया। इससे पहले 29 अगस्त को इसकी 50 मेगावाट क्षमता चालू की गई थी।
इस परियोजना का निर्माण केंद्र सरकार के उपक्रम सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की निगरानी में एलएंडटी ने किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संयंत्र पर करीब 488 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कुल लागत की लगभग आधी राशि, करीब 244 करोड़ रुपये, विश्व बैंक की वित्तीय सहायता के रूप में मिली है। प्लांट करीब 172 हेक्टेयर जल क्षेत्र में फैला है।
जरेडा निदेशक ने बताया कि संयंत्र को सिकिदरी के इरबा ग्रिड से जोड़ा गया है। इससे सुबह छह बजे से दोपहर तीन बजे तक बिजली उपलब्ध होगी। उनके मुताबिक, दिन में मिलने वाली यह बिजली पावर लोड संभालने में मदद करेगी और उस अवधि में ताप विद्युत पर निर्भरता घटेगी। उन्होंने यह भी कहा कि संयंत्र की स्थापना के दौरान कोई हादसा नहीं हुआ।
जरेडा के आंकड़ों के अनुसार, रांची को प्रतिदिन करीब 400 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है। पूरे झारखंड में दिन के समय मांग लगभग 1,200 मेगावाट रहती है, जबकि शाम छह से रात दस बजे के पीक समय में यह करीब 2,300 मेगावाट तक पहुंचती है। निदेशक ने ताप विद्युत की लागत छह रुपये प्रति यूनिट तथा सौर ऊर्जा की लागत तीन से 3.30 रुपये प्रति यूनिट बताई।
अधिकारी ने दावा किया कि बिजली उत्पादन के मामले में झारखंड आत्मनिर्भर हो चुका है और करीब 680 मेगावाट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से दूसरे राज्यों को दी जा रही है। उन्होंने पतरातू विद्युत उत्पादन निगम की दो इकाइयों से 1,600 मेगावाट और तेनुघाट ताप विद्युत संयंत्र से 380 मेगावाट उत्पादन होने की जानकारी भी दी। राज्य को डीवीसी और एनटीपीसी के संयंत्रों से भी बिजली मिलती है।
जरेडा ने अब चांडिल डैम पर करीब 600 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर संयंत्र स्थापित करने की दिशा में पहल शुरू की है। निदेशक के अनुसार, जमीन पर 100 मेगावाट का सौर संयंत्र लगाने के लिए करीब 500 एकड़ भूमि चाहिए। भूमि अधिग्रहण की चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार जलाशयों पर ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।