गेतलसूद सोलर प्लांट की बिजली रात में इस्तेमाल करने के लिए बैटरी स्टोरेज का प्रस्ताव

जेरेडा ने गेतलसूद के 100 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे दिन की बिजली शाम और रात में ग्रिड को दी जा सकेगी।

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गेतलसूद फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट में लगे सौर पैनल

रांची के गेतलसूद डैम में स्थापित फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को रात में भी उपयोग करने की दिशा में तैयारी की जा रही है। झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी ने इसके लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। योजना लागू होने पर दिन में बनी सौर बिजली का एक हिस्सा बैटरी में सुरक्षित रखा जा सकेगा।

गेतलसूद स्थित इस सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापित क्षमता 100 मेगावाट है। अभी प्लांट से दिन के समय करीब 80 से 85 मेगावाट तक उत्पादन होने की जानकारी दी गई है। वास्तविक उत्पादन मौसम, धूप की तीव्रता और दूसरी परिस्थितियों के अनुसार बदलता है। सूर्य की रोशनी नहीं रहने के कारण रात में प्लांट सीधे बिजली पैदा नहीं कर पाता।

प्रस्तावित व्यवस्था में बैटरी को दिन के उत्पादन से चार्ज किया जाएगा। संग्रहित बिजली को जरूरत के अनुसार शाम या रात में ग्रिड में भेजा जा सकेगा। इससे सौर ऊर्जा का इस्तेमाल केवल दिन तक सीमित नहीं रहेगा और अधिक मांग वाले समय में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का विकल्प मिलेगा।

बैटरी स्टोरेज व्यवस्था मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में भी सहायक हो सकती है। शाम के समय बिजली की मांग बढ़ने पर संग्रहित ऊर्जा का उपयोग किए जाने से ग्रिड पर दबाव घटाने की संभावना है। हालांकि, रात में कितनी बिजली मिलेगी और आपूर्ति कितनी देर चलेगी, यह बैटरी की क्षमता तथा परियोजना की तकनीकी संरचना से तय होगा।

इस प्रणाली में बैटरी के साथ इन्वर्टर, बिजली नियंत्रण उपकरण और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली शामिल होती है। ये उपकरण चार्जिंग, ऊर्जा के सुरक्षित संग्रह और तय समय पर बिजली को ग्रिड में भेजने की प्रक्रिया संभालते हैं। बिजली देने की अवधि बैटरी की कुल क्षमता और उसकी डिस्चार्ज दर पर निर्भर करेगी।

यदि संग्रहित सौर बिजली महंगी दर पर खरीदी जाने वाली बिजली का विकल्प बनती है, तो खरीद खर्च घटने की संभावना भी है। फिर भी वास्तविक बचत का निष्कर्ष अभी तय नहीं है। उसका आकलन बैटरी लगाने की लागत, संचालन खर्च, क्षमता और बिजली खरीद दरों को शामिल करते हुए विस्तृत तकनीकी तथा वित्तीय अध्ययन के बाद ही किया जा सकेगा।