गोड्डा की चुन्नी देवी ने सखी मंडल के सहारे सिलाई और खेती से बढ़ाई आजीविका

मेहरमा प्रखंड की चुन्नी देवी ने महिला समूह से जुड़ने के बाद सिलाई-कढ़ाई और सब्जी की खेती शुरू की। छह ऋणों से मिले कुल 1.12 लाख रुपये ने उनके काम को आगे बढ़ाने में मदद की।

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गोड्डा के मेहरमा में सिलाई और सब्जी की खेती से आजीविका बढ़ाती चुन्नी देवी

गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड में चुन्नी देवी ने महिला समूह से जुड़कर परिवार की आजीविका में अपनी भागीदारी बढ़ाई है। कोंकरा मलिक गांव की रहने वाली चुन्नी ने सिलाई-कढ़ाई और सब्जी की खेती को आय का साधन बनाया। इससे पहले घर का खर्च मुख्य रूप से उनके पति दिलीप रजक की दैनिक मजदूरी से चलता था।

परिवार में पांच सदस्य होने और आमदनी सीमित रहने के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन था। बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना भी परिवार के सामने चुनौती थी। इसी आर्थिक परिस्थिति के बीच चुन्नी देवी ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया।

उन्होंने 6 अक्टूबर 2018 को गुलाब आजीविका सखी मंडल की सदस्यता ली। बाद में वह वीरमकित्ता आजीविका महिला ग्राम संगठन से भी जुड़ीं। समूह से मिली वित्तीय सहायता और सामूहिक व्यवस्था के जरिए उन्हें अपनी आजीविका गतिविधियां शुरू करने तथा उनका विस्तार करने का अवसर मिला।

चुन्नी देवी ने कपड़ों की सिलाई और कढ़ाई के अपने हुनर को कमाई से जोड़ा। इसके साथ ही उन्होंने सब्जी की खेती भी अपनाई, जिससे आय का एक अतिरिक्त माध्यम तैयार हुआ। दोनों कामों के जरिए वह अब परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग कर रही हैं और अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह पति की मजदूरी पर निर्भर नहीं हैं।

काम आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने समूह के माध्यम से छह बार ऋण लिया। इनमें दो हजार और पांच हजार रुपये के दो छोटे ऋण तथा 10 हजार, 20 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपये के चार अन्य ऋण शामिल हैं। इस तरह उन्हें अलग-अलग चरणों में कुल एक लाख 12 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली।

ऋण से उपलब्ध पूंजी ने सिलाई और खेती से जुड़े काम को बढ़ाने का रास्ता बनाया। चुन्नी देवी की यात्रा ग्रामीण महिला समूहों के जरिए बचत, ऋण और स्वरोजगार तक पहुंच का एक स्थानीय उदाहरण है। आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे परिवार से निकलकर उन्होंने मेहनत और उपलब्ध संसाधनों के सहारे आय का अपना आधार विकसित किया है।