झारखंड के 2,085 व्यावसायिक शिक्षकों को तीन महीने के बकाया मानदेय का भुगतान

जेईपीसी कार्यालय के बाहर तीन दिन के धरने के बाद कंपनियों ने तीन महीने का मानदेय जारी किया। शिक्षकों को शेष बकाया अगले महीने देने का आश्वासन मिला है।

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रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद कार्यालय के बाहर तीन दिन तक चले धरने के बाद राज्य के व्यावसायिक शिक्षकों को तीन महीने के मानदेय का भुगतान कर दिया गया है। राज्य के सरकारी विद्यालयों में इस समय 2,085 व्यावसायिक शिक्षक कार्यरत हैं। उनका नियोजन विभिन्न आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से किया गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जेईपीसी के निर्देश के बाद संबंधित कंपनियों ने शिक्षकों के खातों में राशि का भुगतान किया। आंदोलन में शामिल शिक्षकों को शेष बकाया मानदेय अगले महीने तक दिए जाने का आश्वासन भी मिला है। अलग-अलग शिक्षकों का मानदेय चार से 12 महीने तक लंबित बताया गया है।

झारखंड व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ का कहना है कि पिछले सात वर्षों से प्रशिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी नहीं हुई है। संघ के मुताबिक, वर्ष 2024-25 और 2025-26 की परियोजना स्वीकृति में मासिक मानदेय 24 हजार रुपये किया गया है, लेकिन संशोधित राशि का भुगतान अभी शुरू नहीं हुआ है। संघ ने इसे अप्रैल 2025 से बकाया राशि के साथ लागू करने की मांग रखी है।

प्रशिक्षकों ने मानदेय में एक समान कटौती की व्यवस्था और प्रत्येक महीने वेतन पर्ची जारी करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि नियमित भुगतान हर महीने की पहली से पांचवीं तारीख के बीच होना चाहिए, ताकि लंबी अवधि तक बकाया रहने की स्थिति दोबारा न बने।

संघ ने सभी व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए ईएसआईसी कार्ड उपलब्ध कराने की मांग उठाई है, जिससे जरूरत पड़ने पर वे और उनके परिवार के सदस्य समय पर इलाज करा सकें। इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षकों ने 60 वर्ष की आयु तक नौकरी की सुरक्षा और नियुक्ति करने वाली आउटसोर्स कंपनियों का कार्यालय रांची में रखने की मांग की है।

शैक्षणिक संसाधनों को लेकर भी संघ ने अपनी बात रखी है। उसकी मांग है कि किताबें, कच्ची सामग्री और स्टेशनरी के साथ उद्योग भ्रमण तथा अतिथि व्याख्यान से जुड़ी व्यवस्था अप्रैल से मई के बीच विद्यालयों में उपलब्ध करा दी जाए। फिलहाल तीन महीने का भुगतान मिलने से आंदोलनरत शिक्षकों को आंशिक राहत मिली है, जबकि शेष बकाये और अन्य मांगों पर आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।