बोकारो इस्पात संयंत्र के सभी प्रवेश द्वार झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रविवार शाम तक खोल दिए गए। जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों की बंदी से गेट मुक्त कराते हुए कर्मचारियों की आवाजाही सुनिश्चित की। संयंत्र का मुख्य द्वार सुबह खोला गया था, जबकि शेष गेट अदालत के निर्देश के बाद खुलवाए गए।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ नौकरी की मांग को लेकर 10 अक्टूबर से टू-टैंक गार्डन में आमरण अनशन कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आंदोलनकारियों ने 15 अक्टूबर को गेट संख्या नौ और दस बंद किए थे। अगले दिन मुख्य द्वार को छोड़कर संयंत्र के अन्य गेट भी बंद कर दिए गए थे।
इसके बाद बोकारो स्टील प्लांट का प्रबंधन 17 अक्टूबर को हाईकोर्ट पहुंचा। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने अपनी याचिका में झारखंड के मुख्य सचिव, बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक, चास के अनुमंडल पदाधिकारी, बोकारो विधायक श्वेता सिंह तथा विस्थापित अप्रेंटिस संघ को प्रतिवादी बनाया है।
मामले की विशेष सुनवाई रविवार को न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने की। बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ऑनलाइन माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई के बाद उपायुक्त को सभी गेट तत्काल खुलवाने और संयंत्र के कर्मचारियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
गेट खुलने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। विधायक श्वेता सिंह धरनास्थल पर बनी हुई हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने और रक्तचाप कम होने की जानकारी भी सामने आई है। विधायक ने कहा है कि विस्थापितों की मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है। तब तक सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। फिलहाल प्रशासन ने संयंत्र के रास्ते खोल दिए हैं, लेकिन नौकरी की मांग को लेकर चल रहा अनशन और धरना जारी रहने से विवाद का अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है।