गोड्डा के कालीपीठ में विसर्जन मार्ग पर सहमति नहीं, परिसर में तालाब की खुदाई शुरू

कालीपीठ पूजा समिति ने जर्जर पुराने मार्ग से बड़ी प्रतिमा ले जाने में नुकसान की आशंका जताई है। नए मार्ग की अनुमति नहीं मिलने के बाद मंदिर परिसर में तालाब खोदा जा रहा है।

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गोड्डा के कालीपीठ परिसर में प्रतिमा विसर्जन के लिए खोदा जा रहा तालाब

गोड्डा के कालीपीठ में दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन का मार्ग तय नहीं होने से गुरुवार, 22 अक्टूबर को विसर्जन नहीं हो सका। प्रतिमा अभी मंदिर परिसर में स्थापित है। पूजा समिति ने प्रशासन से शहर के राजकचहरी तालाब तक जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने स्थानीय तालाब में ही विसर्जन कराने का निर्देश दिया है।

पूजा समिति की संचालिका वंदना दुबे के मुताबिक, पहले इस्तेमाल किया जाने वाला मार्ग काफी जर्जर है। समिति का कहना है कि इस रास्ते से इस वर्ष बनाई गई बड़ी प्रतिमा को ले जाने पर उसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। इसी आधार पर समिति ने दूसरे मार्ग से राजकचहरी तालाब तक जाने के लिए आवेदन दिया था।

प्रशासन ने नए मार्ग की अनुमति नहीं देते हुए हाईवे और अन्य रास्तों से जुड़ी कठिनाइयों का उल्लेख किया है। प्रशासनिक पत्र में हाईवे से प्रतिमा ले जाने के दौरान दुर्घटना की आशंका भी जताई गई है। निर्धारित समय में स्थानीय तालाब में विसर्जन सुनिश्चित कराने के लिए मौके पर दंडाधिकारी और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

समिति ने पुराने मार्ग से प्रतिमा नहीं ले जाने का निर्णय किया है। प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने के बाद कालीपीठ परिसर की रैयती जमीन पर ही तालाब की खुदाई शुरू करा दी गई। समिति का कहना है कि उचित मार्गदर्शन मिलने तक प्रतिमा पंडाल में ही रहेगी और उसे विसर्जन के लिए बाहर नहीं ले जाया जाएगा।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से कालीपीठ में अपेक्षाकृत छोटी प्रतिमा बनाई जाती थी। उसे ठेले से स्थानीय तालाब तक ले जाकर विसर्जित किया जाता था। इस बार बड़ी प्रतिमा स्थापित होने और भव्य पंडाल बनाए जाने के कारण समिति पुरानी व्यवस्था को व्यावहारिक नहीं मान रही है।

समिति नए मार्ग की मांग पर कायम है, जबकि प्रशासन स्थानीय तालाब में पुरानी व्यवस्था के अनुसार विसर्जन कराने के पक्ष में है। खबर तैयार किए जाने तक दोनों पक्षों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। परिसर में तालाब की खुदाई जारी थी और प्रशासन ने स्थल पर निगरानी की व्यवस्था कर रखी थी।