साहिबगंज के कलाकार अमृत प्रकाश कबाड़ से गढ़ रहे कलाकृतियां, सजा रहे ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’

लोहे, प्लास्टिक और पुराने पुर्जों को कला का रूप देने वाले अमृत प्रकाश साहिबगंज में 22 हजार वर्गफीट के ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’ के लिए कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं।

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साहिबगंज के कलाकार अमृत प्रकाश की कबाड़ से तैयार कलाकृतियां

साहिबगंज के कलाकार अमृत प्रकाश अनुपयोगी लोहे, प्लास्टिक और पुराने यांत्रिक पुर्जों को कलाकृतियों में बदलकर अलग पहचान बना रहे हैं। अब उन्हें शहर में 22 हजार वर्गफीट क्षेत्र में तैयार हो रहे ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’ को अपनी कृतियों से सजाने का अवसर मिला है। उनकी कला पुरानी वस्तुओं के दोबारा उपयोग के साथ स्वच्छ पर्यावरण का संदेश भी सामने रखती है।

अमृत अपनी रचनाओं में पुरानी साइकिल और बाइक के हिस्सों, नट-बोल्ट, बर्तनों तथा अन्य बेकार सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया है कि वह अब तक करीब दो हजार कलाकृतियां बना चुके हैं। किसी कृति को तैयार करने में लगने वाला समय उसके आकार और स्वरूप पर निर्भर करता है तथा सामान्यतः एक से दो सप्ताह लगते हैं।

उनकी प्रमुख रचनाओं में फॉसिल्स पार्क का 65 फीट ऊंचा डायनासोर और उधवा पक्षी अभयारण्य के लिए बनाई गई पक्षियों की आकृतियां शामिल हैं। प्रधानमंत्री संग्रहालय में कबाड़ से निर्मित बिरसा मुंडा की उनकी प्रतिमा रखी गई है। देवघर हवाई अड्डे पर ‘नारीवंदन’ विषय पर बनी चार महिला आकृतियां भी प्रदर्शित हैं, जिनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर सराहना की थी।

इसके अतिरिक्त पटना नगर निगम के अनुरोध पर तैयार 14 फीट की गौरैया कंकड़बाग गोलंबर पर लगाई गई है। कबाड़ से बनाई गई ‘आई लव चकाचक पटना’ कृति को 15 अगस्त 2024 की झांकी में प्रथम पुरस्कार मिला था। पटना स्थित सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय में गुरु-शिष्य संबंध पर आधारित उनकी आठ फीट ऊंची रचना भी प्रदर्शित है।

अमृत के अनुसार, कबाड़ से कलाकृति बनाने का विचार उन्हें वर्ष 2012 में पटना में पढ़ाई के दौरान आया था। उनकी शुरुआती रचनाओं में गुटखे के पाउच से बनाया गया एक बच्चा शामिल था, जिसके माध्यम से नशामुक्ति का संदेश दिया गया। यह कृति पटना के किलकारी बाल भवन में रखी गई है।

रेलवे स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पाने के बाद अमृत ने पटना के आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में अध्ययन किया और वहां स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद उन्होंने कोलकाता से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की डिग्री ली। साहिबगंज का प्रस्तावित पार्क अब उनके कौशल को स्थानीय स्तर पर बड़े सार्वजनिक परिसर में देखने का नया अवसर देगा।