गोड्डा जिले के मोतिया गांव में पेयजल आपूर्ति की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी शिकायत है कि वर्ष 2008-09 में बनाई गई जलमीनार की लंबे समय से समुचित सफाई और गाद निकासी नहीं हुई। राज्य स्तर से तीन बार जांच तथा कार्रवाई के निर्देश जारी होने के बावजूद ग्रामीणों को ठोस कदम उठाए जाने का इंतजार है।
शिकायत के अनुसार, जलमीनार की क्षमता 1.25 लाख लीटर है और इसके भीतर करीब चार से छह फीट तक गाद जमा होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी टंकी से घरों तक पानी पहुंचाया जाता है। उन्होंने गंदे पानी की आपूर्ति से जलजनित बीमारियों का खतरा बने रहने की आशंका भी जताई है। इन दावों की विभागीय जांच अभी महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों ने जलस्रोत की व्यवस्था पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि टंकी में पानी भेजने वाला कुआं खुला है और तालाब के पास स्थित है। बारिश में तालाब का गंदा पानी कुएं तक पहुंचने तथा उसमें जीव-जंतु गिरने की शिकायत की गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, पानी को किसी फिल्टर या शोधन संयंत्र से गुजारे बिना जलमीनार तक भेजा जाता है।
मामले में राज्य सरकार को ई-मेल से शिकायत भेजे जाने के बाद अलग-अलग स्तरों से जांच के निर्देश जारी हुए। नगर विकास विभाग ने 2 फरवरी 2026 के पत्र में गोड्डा नगर परिषद के प्रशासक या कार्यपालक पदाधिकारी को जलमीनार और पाइपलाइन की स्थिति जांचकर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा था।
इसके बाद राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन ने 23 मई 2026 को गोड्डा के कार्यपालक अभियंता से जलमीनार में गाद और खुले कुएं में जैविक कचरे से जुड़ी शिकायत की जांच रिपोर्ट मांगी। छह जुलाई को दोबारा शिकायत किए जाने के बाद मिशन ने छह अगस्त को फिर नियमानुसार कार्रवाई कर उसका प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पत्र की प्रतिलिपि देवघर के अधीक्षण अभियंता और दुमका के मुख्य अभियंता को भी भेजी गई।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के गोड्डा कार्यपालक अभियंता के अनुसार, वर्ष 2008 की इस योजना में जलमीनार की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी मुखिया को दी गई थी। फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों, जलस्रोत की स्थिति और सरकारी निर्देशों के अनुपालन पर जांच तथा कार्रवाई रिपोर्ट सामने आने का इंतजार है।