गोड्डा के होपनाटोला में करम एकादशी की तैयारी, संजत की रस्म के बाद बहनें रखेंगी उपवास

पथरगामा प्रखंड के होपनाटोला गांव में कुंवारी बहनों ने जावा डाली की पूजा और करम गीतों के साथ संजत की रस्म पूरी की। करम एकादशी पर वे भाइयों की सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखेंगी।

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गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड स्थित होपनाटोला गांव में करम परब की पारंपरिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पीपरा पंचायत के इस गांव में कुंवारी बहनों ने सोमवार को संजत की रस्म निभाई। इस दौरान जावा डाली की विधिपूर्वक पूजा की गई और करम गीत गाकर जावा को जगाया गया।

मंगलवार को करम एकादशी के अवसर पर बहनें दिनभर उपवास रखेंगी। इससे पहले वे घर और आंगन की साफ-सफाई करने के बाद दहंगी के साथ नदी में स्नान करने जाएंगी। स्नान के बाद पुरखा देवता और भूता के नाम पर पांच दतवन, खीरे का पत्ता, हल्दी और तेल अर्पित करने की परंपरा है।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, करम परब से करीब छह दिन पहले बहनें जावा डाली लाती हैं। इसके बाद सुबह और शाम उसका लालन-पालन किया जाता है तथा करम गीतों के साथ उसे जगाने की रस्म निभाई जाती है। जावा डाली में अपने नाम की खूंटी लगाने के बाद बहनें विशेष परहेज का पालन भी करती हैं।

करम एकादशी के दिन आरवा खाने के बाद उपवास शुरू होगा। गांव के भाई करम डाली लेकर आएंगे और रात में उसकी पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद उपवास रखने वाली बहनें फलाहार करेंगी। वे इस पूजा के माध्यम से अपने भाइयों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं।

आदिवासी कुड़मी समाज के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार महतो के अनुसार, समुदाय के पर्वों में करम का विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि जावा को मां के समान मानकर उसकी देखभाल की जाती है। पर्व की रस्में प्रकृति, कृषि और भाई-बहन के संबंध से जुड़ी सामाजिक परंपराओं को सामने लाती हैं।

करम परब झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में भी कुड़मी समुदाय के बीच मनाया जाता है। होपनाटोला में आयोजित संजत की रस्म में गांव के कई लोग शामिल हुए। सामूहिक पूजा और पारंपरिक गीतों के माध्यम से ग्रामीणों ने करम एकादशी से पहले अपनी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाया।