गोड्डा जिले में मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना के तहत गरीब परिवारों को दिए जाने वाले नमक की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने उसका वितरण तत्काल रोक दिया है। विभागीय समीक्षा बैठक में जिला आपूर्ति पदाधिकारी की ओर से बताया गया कि प्रयोगशाला जांच में नमक के नमूने में आयोडीन की मात्रा कम पाई गई है।
विभाग ने संबंधित नमूने की दोबारा जांच स्टेट लैब से कराने का निर्देश दिया है। अंतिम रिपोर्ट मिलने तक गोड्डा में इस नमक का वितरण पूरी तरह बंद रहेगा। इस कदम का उद्देश्य जांच पूरी होने से पहले संदिग्ध गुणवत्ता वाले नमक को लाभार्थियों तक पहुंचने से रोकना है।
समीक्षा में राज्य भर में योजना की प्रगति पर भी चिंता जताई गई। अक्टूबर में नमक वितरण की प्रगति 26.56 प्रतिशत दर्ज की गई। विभाग ने सभी जिलों को समय पर वितरण पूरा करने तथा गोदामों में उपलब्ध नमक की डोर स्टेप डिलीवरी प्रत्येक महीने की अंतिम तारीख तक सुनिश्चित करने को कहा है।
लोहरदगा और पाकुड़ में पोर्टल के आंकड़ों तथा गोदामों के वास्तविक भंडार के बीच अंतर भी सामने आया। दोनों जिलों के आपूर्ति पदाधिकारियों ने गोदामों में नमक का भौतिक भंडार शून्य बताया, जबकि आहार पोर्टल पर अवशेष मात्रा दिखाई दे रही थी। विभाग ने दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण और विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है।
अधिकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति का मिलान कर त्रुटियों को जल्द दूर करने का निर्देश दिया गया है। योजना के तहत राज्य के 68 लाख गरीब परिवारों को हर महीने प्रति परिवार एक किलोग्राम नमक मुफ्त दिया जाता है। ऐसे में आपूर्ति के साथ गुणवत्ता और भंडार संबंधी आंकड़ों की शुद्धता भी महत्वपूर्ण है।
आयोडीन शरीर के सामान्य संचालन के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। इसकी कमी से थायराइड ग्रंथि बढ़ने, हाइपोथायरायडिज्म तथा बच्चों के मानसिक विकास पर असर पड़ने का जोखिम बताया गया है। गोड्डा में अब वितरण का अगला निर्णय स्टेट लैब की अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा।