रांची से झारखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की अंतिम छोर तक पहुंच और जलापूर्ति व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से जुड़ी अपनी प्राथमिकताएं राष्ट्रीय मंच पर रखेगी। सात अक्टूबर को बेंगलुरु में जल जीवन मिशन 2.0 पर होने वाली विशेष पैनल चर्चा में राज्य का प्रतिनिधिमंडल अपनी रणनीतियों के साथ जमीनी चुनौतियों की जानकारी भी साझा करेगा।
राज्य का जोर केवल पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। अगला लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके लिए पेयजल स्रोतों की स्थिरता तथा पहले से बनी परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
इस व्यवस्था में ग्राम पंचायतों और ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका बढ़ाने की योजना है। इन्हें स्थानीय जल प्रणालियों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाने पर जोर रहेगा, ताकि गांव के स्तर पर संचालन, देखरेख और आवश्यक मरम्मत का काम अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।
डिजिटल निगरानी भी प्रस्तावित रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। सुजलाम भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत जलापूर्ति परिसंपत्तियों की डिजिटल मैपिंग, गांवों के लिए ‘सुजल गांव’ यूनिक आईडी और जीआईएस आधारित रजिस्ट्री का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य जल योजनाओं से संबंधित आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ाना और वास्तविक समय पर निगरानी को मजबूत करना है।
स्थानीय स्तर पर तकनीकी क्षमता विकसित करने के लिए नल जल मित्र कार्यक्रम के तहत कार्यबल को मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण देने की बात भी सामने आई है। यह प्रशिक्षण कौशल विकास मंत्रालय के सहयोग से दिए जाने की योजना है, जिससे छोटी तकनीकी खराबियों के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोग उपलब्ध हो सकें।
राज्य की प्रस्तुति में भूजल स्तर में गिरावट से जुड़ी चुनौती भी शामिल होगी। इसके लिए वर्षा जल संचयन और इस्तेमाल हो चुके घरेलू पानी के प्रबंधन के उपायों को तेज करने पर जोर दिया गया है। कॉन्क्लेव में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और जल जीवन मिशन के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी प्रस्तावित है।